नारायणपुर में सर्च ऑपरेशन के दौरान मिला हथियारों का भंडार, सुरक्षा एजेंसियां सतर्क
नारायणपुर। बस्तर संभाग के नारायणपुर जिले में शांति व्यवस्था को चाक-चौबंद करने और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों पर पूरी तरह नकेल कसने के लिए सुरक्षा बलों द्वारा लगातार सघन तलाशी अभियान (सर्च ऑपरेशन) चलाए जा रहे हैं। इसी सिलसिले में सीमा सुरक्षा बल (BSF) की 133वीं बटालियन को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। बल के जवानों ने मसपुर और गुडरापाल के घने वन क्षेत्रों में चलाए गए एक विशेष ऑपरेशन के दौरान जमीन के नीचे छिपाकर रखा गया भारी मात्रा में हथियारों और गोला-बारूद का डंप बरामद किया है। इस बड़ी बरामदगी के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर सर्चिंग और अधिक तेज कर दी है।
कैंप से निकले जवानों ने घेराबंदी कर पकड़ा संदिग्ध ठिकाना
मिली जानकारी के अनुसार, बीते 16 जून को बीएसएफ की ‘ई’ कंपनी द्वारा कैंप मसपुर से लगे दूरस्थ और संवेदनशील वन क्षेत्रों में नियमित गश्त और तलाशी अभियान शुरू किया गया था। जंगल के भीतर कड़े पहरे के बीच आगे बढ़ रहे जवानों को एक स्थान पर कुछ संदिग्ध हलचल और मिट्टी दबे होने के संकेत मिले। जवानों ने तुरंत सूझबूझ का परिचय देते हुए पूरे इलाके को अपने घेरे में ले लिया। बम निरोधक दस्ते और तकनीकी इनपुट्स की मदद से जब सावधानीपूर्वक जांच की गई, तो वहां से अवैध असलहों और सैन्य सामग्रियों का एक बड़ा जखीरा बरामद हुआ, जिसे सुरक्षा बलों ने तुरंत अपनी कस्टडी में ले लिया।
बरामद हथियारों की सूची: बीजीएल लॉन्चर और 12 बोर राइफल शामिल
सुरक्षा बलों द्वारा जंगल के गुप्त ठिकाने से जब्त की गई युद्ध सामग्रियों में निम्नलिखित घातक हथियार शामिल हैं:
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देसी बीजीएल (BGL) लॉन्चर: 01 नग
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बीजीएल गन: 07 नग
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12 बोर राइफल: 01 नग
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जिंदा कारतूस: 37 राउंड
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इलेक्ट्रिक वायर: लगभग 15 मीटर
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सैन्य पोच (सामान रखने का थैला): 05 नग
सुरक्षा एजेंसियों की प्रारंभिक जांच और इनपुट्स के अनुसार, इन हथियारों को किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने या सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचाने के मकसद से बहुत पहले से जंगल के भीतर डंप करके सुरक्षित रखा गया था।
नक्सलमुक्त घोषणा के बाद भी दूरस्थ इलाकों में पैनी नजर
स्थानीय पुलिस और सुरक्षा मामलों के उच्च अधिकारियों के मुताबिक, हालांकि चालू वर्ष में 31 मार्च 2026 को नारायणपुर जिले को आधिकारिक तौर पर नक्सलमुक्त घोषित किया जा चुका है, इसके बावजूद सुरक्षा बल किसी भी प्रकार की ढील देने के मूड में नहीं हैं। अंदरूनी, पथरीले और दुर्गम क्षेत्रों में ये अभियान लगातार इसलिए चलाए जा रहे हैं ताकि अतीत में छिपाकर छोड़े गए हथियारों, आईईडी (IED) विस्फोटकों और अन्य घातक संसाधनों को पूरी तरह खोजकर नष्ट किया जा सके। इसका मुख्य उद्देश्य अंदरूनी गांवों में स्थायी शांति, विकास और सुरक्षा का माहौल कायम करना है।
पुलिस और केंद्रीय बलों का संयुक्त अभियान रहेगा जारी
नारायणपुर जिला पुलिस प्रशासन और केंद्रीय सशस्त्र बलों के आला कमांडरों ने साफ कर दिया है कि जिले की सीमाओं और आंतरिक क्षेत्रों को अभेद्य बनाने के लिए यह संयुक्त कॉम्बिंग ऑपरेशन आने वाले दिनों में भी निरंतर जारी रहेगा। खुफिया तंत्र को मजबूत करते हुए जंगलों और पहाड़ों पर लगातार ड्रोन और तकनीकी माध्यमों से भी पैनी निगरानी रखी जा रही है, ताकि किसी भी अप्रत्याशित या अवैध गतिविधि को पनपने से पहले ही पूरी तरह कुचला जा सके।

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