दुर्ग में सैलून संचालक पर जानलेवा हमला, बाल काटने से मना करना पड़ा भारी
Durg Salon Attack Case : ने जिले में कानून-व्यवस्था और युवाओं में बढ़ती हिंसक प्रवृत्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। मामूली बात पर सैलून संचालक की हत्या की साजिश रचने और उस पर चाकू से हमला करने का यह सनसनीखेज मामला छावनी थाना क्षेत्र का है।
घटना 4 जनवरी की रात की है। जानकारी के अनुसार, क्लासिक कट्स सैलून का संचालक पूनाराम सेन उर्फ विक्की उस समय दुकान में एक अन्य ग्राहक का बाल काट रहा था। इसी दौरान एक नाबालिग बाल कटवाने पहुंचा। पूनाराम ने विनम्रता से कुछ देर इंतजार करने को कहा, लेकिन इसी बात पर नाबालिग भड़क गया। दोनों के बीच कहासुनी हुई और गाली-गलौज के बाद नाबालिग वहां से चला गया।
पुलिस जांच में सामने आया कि नाबालिग ने इस बात की जानकारी अपने दोस्त शेख साहिल को दी, जिसने आगे निकेश सेन को भी इसमें शामिल कर लिया। इसके बाद तीनों ने मिलकर सैलून संचालक की हत्या की योजना बना ली। शेख साहिल ने नाबालिग को चाकू दिया और अपनी स्कूटी (CG 07 CZ 2805) से उसे पीछे बैठाकर निकेश के साथ ले गया।
शास्त्री नगर शिव मंदिर के पास एक गली में, दुकान बंद कर घर लौट रहे पूनाराम सेन पर मुंह ढंककर चाकू से हमला कर दिया गया। गंभीर रूप से घायल पूनाराम को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां वह फिलहाल ICU में इलाजरत है।
घटना के बाद आरोपी फरार हो गए थे, लेकिन पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 7 जनवरी को नाबालिग सहित आरोपियों को हिरासत में ले लिया। Durg Salon Attack Case यह दिखाता है कि छोटी-सी बात कैसे खतरनाक अपराध में बदल सकती है, और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई कितनी जरूरी है।

बड़वानी जिले को एक्सपोर्ट हब के रूप में विकसित करने के लिये कृषि उन्नयन संवाद का हुआ आयोजन
मुख्यमंत्री डॉ. यादव कुलैथ में बुधवार को कृषक कल्याण वर्ष के पहले किसान सम्मेलन का करेंगे शुभारंभ
हरदा के डायल-112 हीरोज: सूझबूझ और साहस से टली बड़ी दुर्घटना
विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर कोचिंग संस्थानों के लिए नए नियमों पर मंथन
महिला अपराधों की विवेचना में सुधार हेतु एक दिवसीय कार्यशाला सम्पन्न
लोकमाता देवी अहिल्या बाई होल्कर से प्रेरणा लेकर करे राष्ट्र निर्माण: राज्यपाल पटेल
गुजरात में समुद्री रास्ते से तस्करी नाकाम, पोरबंदर के पास भारी मात्रा में मादक पदार्थ बरामद
नए जिलों में अधिकारियों की तैनाती, प्रशासनिक फेरबदल
मध्य प्रदेश बजट से आदिवासी समाज को उम्मीदें, लेकिन कुपोषण खत्म करने की चुनौती बरकरार