मीनाक्षी नटराजन प्रकरण: क्या कानूनी या राजनीतिक रास्ते अब भी खुले हैं?
भोपाल: मध्य प्रदेश की सियासत में सोमवार, 9 जून का दिन बेहद उथल-पुथल भरा रहा। यह दिन कांग्रेस के लिए एक बड़ा सबक लेकर आया, तो वहीं सत्ताधारी दल भाजपा को बिना किसी अतिरिक्त प्रयास के राज्यसभा की एक और सीट जीतने का सुनहरा मौका मिल गया। सोमवार शाम करीब 5:30 बजे, भाजपा की लिखित आपत्ति के बाद चुनाव आयोग के अधिकारियों ने कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र (नॉमिनेशन) निरस्त कर दिया। इस फैसले के बाद कांग्रेस जहां इसे 'लोकतंत्र की हत्या' बता रही है, वहीं भाजपा इसे नियमों के तहत पूरी तरह सही ठहरा रही है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या मीनाक्षी नटराजन और कांग्रेस के पास इस संकट से निकलने का कोई रास्ता बचा है? कानूनविदों के मुताबिक, उनके पास अभी भी 3 अहम विकल्प मौजूद हैं:
विकल्प 1: चुनाव आयोग से समीक्षा (Review) की गुहार
नामांकन खारिज होने के तुरंत बाद दिल्ली से लेकर भोपाल तक कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने निर्वाचन सदन के बाहर विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया। कांग्रेस का पहला कदम चुनाव आयोग के सामने दोबारा समीक्षा की मांग करना हो सकता है। पार्टी आयोग के समक्ष यह तर्क दे सकती है कि शपथ पत्र (एफिडेविट) में जिस जानकारी को छिपाने का आरोप है, वह दरअसल एक निजी शिकायत का मामला था, कोई आपराधिक केस नहीं। इसलिए उसे सार्वजनिक करना अनिवार्य नहीं था। अगर चुनाव आयोग इस दलील से सहमत होता है, तो वह अपने फैसले पर पुनर्विचार कर सकता है।
विकल्प 2: हाई कोर्ट में रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले को चुनौती
आमतौर पर ऐसे राजनीतिक और चुनावी विवादों में दल तुरंत अदालत का रुख करते हैं। कांग्रेस और मीनाक्षी नटराजन भी मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में याचिका दायर कर रिटर्निंग ऑफिसर (RO) के इस फैसले को चुनौती दे सकती हैं। कानूनी जानकारों का मानना है कि यह प्रक्रिया काफी तेज और प्रभावी होती है, जहां दोनों पक्षों की दलीलों को गहराई से सुना जाता है। कई मामलों में उम्मीदवारों को अदालत से फौरी राहत (स्टे) मिल जाती है।
विकल्प 3: चुनाव नतीजों के बाद 'इलेक्शन पिटीशन' (सबसे जटिल रास्ता)
यदि वर्तमान चरण में कोई राहत नहीं मिलती, तो तीसरा और सबसे लंबा रास्ता चुनाव परिणामों को चुनौती देने का है। इसके तहत कांग्रेस को पहले चुनाव और उसके नतीजों के घोषित होने का इंतजार करना होगा। इसके बाद, पार्टी 'इलेक्शन पिटीशन' (चुनाव याचिका) के माध्यम से पूरी चुनावी प्रक्रिया और परिणाम को ही कोर्ट में चुनौती दे सकती है। हालांकि, इस कानूनी लड़ाई में फैसला आने में काफी लंबा समय लग जाता है।
बीजेपी के महेश केवट की राह हुई आसान
मध्य प्रदेश में राज्यसभा की कुल तीन सीटों पर चुनाव होना है। संख्या बल के हिसाब से दो सीटें पहले से ही भाजपा के खाते में जाना तय थीं। तीसरी सीट के लिए मुकाबला दिलचस्प था, जहां भाजपा ने महेश केवट को मैदान में उतारा था और उनका मुकाबला कांग्रेस की मीनाक्षी नटराजन से था। अब मीनाक्षी का नामांकन रद्द होने के बाद, बीजेपी उम्मीदवार महेश केवट के निर्विरोध राज्यसभा पहुंचने का रास्ता पूरी तरह साफ नजर आ रहा है।

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