लिंगायत समाज ने पांढुर्णा कलेक्टर ऑफिस के लिए दान कर दी 5 एकड़ जमीन
छिन्दवाड़ा/पांढुर्णा : आमतौर पर देखा जाता है कि सामाजिक संगठन समाज के उत्थान के सरकार से मदद लेकर लोगों की मदद करते हैं लेकिन चुनाव के पहले गठित नए जिले पांढुर्ना में इसका ठीक उल्टा देखने मिला है. यहां एक समाज ने उल्टा सरकार को कलेक्टर कार्यालय बनाने के लिए जमीन दान में दी है, जो अपने आप में एक चर्चा का विषय बना हुआ है.
कलेक्ट्रेट के लिए जमीन दान क्यों?
दरअसल, विधानसभा चुनाव के पहले छिंदवाड़ा से अलग कर पांढुर्णा को नया जिला बना दिया गया था. आनन-फानन में कलेक्टर और SP की नियुक्ति भी की गई लेकिन इन विभागों के संचालन के लिए अलग से बिल्डिंग या दफ्तर नहीं थे. कलेक्टर मंडी के दफ्तर में अपने काम निपटाते थे, तो एसपी, SDOP के ऑफिस में काम कर रहे हैं. इसी तरह सभी दफ्तर के काम छिंदवाड़ा से ही संचालित हो रहे हैं. यही वजह है कि एक सामाजिक संगठन ने आगे आकर कलेक्ट्रेट के नाम पर 5 एकड़ जमीन दान कर दी.
लिंगायत समाज ने 5 एकड़ जमीन कर दी दान
शहर के सैकड़ों साल पुराने वीरशैव लिंगायत मठ और गणपति मठ संस्थान ने कलेक्टर कार्यालय के लिए मध्यप्रदेश शासन को 5 एकड़ जमीन दान दी है. इस जमीन की कीमत करीब तीन करोड़ रुपए बताई जा रही है. वीरशैव लिंगायत समाज समिति के पदाधिकारियों ने कलेक्टर अजय देव शर्मा को सहमति पत्र सौंपते हुए अनुरोध किया कि नवगठित जिले के विकास के लिए जिला कलेक्टर कार्यालय का निर्माण जल्द शुरू किया जाए.
संस्थान के वीररूद्रमुनि शिवाचार्य ने 20 फरवरी को मध्यप्रदेश शासन के लिए प्रभारी तहसीलदार को 5 एकड़ भूमि का रजिस्टर्ड दानपत्र दिया था. वीरशैव लिंगायत समाज समिति सहित मठ से जुड़े सैकड़ों लोगों ने शासन को नामांतरण व अन्य कार्रवाई के लिए सहमति भी दे दी है.
शहर के विकास के लिए किया दान
समाज के अध्यक्ष राजू जुनूनकर ने बताया, '' शहर के नजदीक सरकारी जमीन का अभाव था जिससे कलेक्टर कार्यालय बनाया जा सके. हमारे समाज ने जिले के विकास को ध्यान में रखते हुए 5 एकड़ जमीन दान में दी है जिससे जल्द से जल्द भवन का निर्माण हो और शहर के विकास कार्यों को रफ्तार मिल सके.''
जूना पांढुर्णा बनेगा जिले का केंद्र
मठ द्वारा दान दी गई जमीन अमरावती रोड पर शनि मंदिर के सामने सांई मंदिर से एक खेत पीछे है. इसके लिए मुख्य सड़क से लगभग डेढ़ सौ मीटर तक 40 फीट की सड़क भी प्रस्तावित की गई है. इस सड़क के अलावा जूना पांढुर्ना मार्ग और रेललाइन के किनारे से चंद्रभागा नदी वाले पुराने पांधननुमा मार्ग को भी विस्तारित कर संबंधित जमीन तक पहुंचा जा सकता है. लगभग साढ़े तीन सौ साल पहले पांढुर्ना शहर जूना पांढुर्ना में स्थित था. उस समय दानदाताओं ने मठ को कई जमीनें दान में दी थीं. वर्षों बाद मठ की इस जमीन से जनसुविधा के कार्य होने जा रहे हैं.
1600 साल पुराना है मठ का इतिहास
शारदा मार्केट में स्थित श्री वीरशैव लिंगायत मठ संस्थान उर्फ गणपति मठ का इतिहास लगभग 1600 साल पुराना है. मान्यता के अनुसार मध्यप्रदेश राज्य में पांढुर्ना शहर में ही यह एकमात्र गणपति मठ मौजूद है. इस मठ में करीब 975 सालों से भगवान श्रीगणेश की स्थापना कर गणेशोत्सव मनाने के प्रमाण भी मौजूद हैं. यह गणपति मठ पांढुर्ना क्षेत्र की आस्था व भक्ति का प्रतीक है.

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