जासूसी के आरोपों पर विदेशी पत्रकार की सफाई, कहा- गलत तरीके से पेश किया गया
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नॉर्वे यात्रा के दौरान भारत और नॉर्वे के राष्ट्राध्यक्षों की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूछा गया एक सवाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा और विवाद का विषय बन गया है। प्रेसवार्ता के दौरान नॉर्वे की एक महिला पत्रकार, हेले लिंग ने पीएम मोदी से एक तीखा सवाल पूछा, जिसके बाद वह सोशल मीडिया यूजर्स के निशाने पर आ गईं। इंटरनेट पर लोगों ने उन्हें जमकर ट्रोल किया और उन पर 'विदेशी एजेंट' तथा 'जासूस' होने तक के गंभीर आरोप लगा दिए। अब इस पूरे विवाद और ट्रोलिंग पर खुद पत्रकार हेले लिंग ने सामने आकर अपनी सफाई पेश की है।
प्रेस की आजादी पर सवाल उठाने के बाद शुरू हुआ विवाद
दरअसल, सोमवार को नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में आयोजित द्विपक्षीय प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान स्थानीय अखबार 'डैग्सविसेन' की पत्रकार हेले लिंग ने प्रधानमंत्री मोदी से भारत में प्रेस की स्वतंत्रता (फ्रीडम ऑफ प्रेस) को लेकर सवाल किया था। इसके तुरंत बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उनके खिलाफ अभियानों की बाढ़ आ गई और लोगों ने उन्हें किसी बाहरी एजेंसी की जासूस करार दे दिया। इस पर पलटवार करते हुए हेले ने स्पष्ट किया कि वे कोई जासूस नहीं हैं, बल्कि केवल एक पत्रकार के तौर पर अपना लोकतांत्रिक कर्तव्य निभा रही थीं।
विशेष ब्रीफिंग के बीच से नाराज होकर बाहर निकली थीं हेले
पूरा घटनाक्रम तब और बढ़ गया जब हेले लिंग ने पीएम मोदी के प्रस्थान के समय इस बात पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई कि भारतीय दल ने 'दुनिया की सबसे स्वतंत्र प्रेस' से और सवाल क्यों नहीं लिए। इसके बाद, ओस्लो स्थित भारतीय दूतावास ने उन्हें एक विशेष प्रेस ब्रीफिंग के लिए आमंत्रित किया। इस ब्रीफिंग में हेले ने भारत की अंतरराष्ट्रीय साख और मानवाधिकारों की स्थिति पर सीधे तीखे सवाल दागे, जिसका जवाब वहां मौजूद विदेश मंत्रालय के सचिव सिबी जॉर्ज दे रहे थे।
चर्चा के दौरान जब हेले ने भारतीय अधिकारी सिबी जॉर्ज की बात को बीच में ही काटने (इंटरप्ट करने) की कोशिश की, तो राजनयिक ने उन्हें शालीनता से टोकते हुए चुप रहने और पूरा जवाब सुनने को कहा। इस बात से खफा होकर हेले बीच में ही ब्रीफिंग रूम छोड़कर बाहर चली गईं। जब इस पूरी बहस का वीडियो इंटरनेट पर वायरल हुआ, तो दुनिया भर के भारतीय यूजर्स ने उन्हें आड़े हाथों लेना शुरू कर दिया।
सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग के बाद बढ़ा फॉलोवर्स का ग्राफ
लगातार मिल रही प्रतिक्रियाओं और आरोपों के बाद हेले लिंग ने सोशल मीडिया पर एक लंबा नोट साझा करते हुए लिखा, 'मैंने अपने पूरे करियर में कभी नहीं सोचा था कि मुझे खुद को साबित करने के लिए ऐसा कुछ लिखना पड़ेगा। लेकिन मैं साफ कर देना चाहती हूँ कि मैं किसी भी देश की विदेशी एजेंट नहीं हूँ और न ही मुझे किसी विदेशी सरकार ने यहां भेजा है। मेरा पेशा पत्रकारिता है और मैं बिना किसी एजेंडे के सिर्फ अपना काम कर रही हूँ।'
दिलचस्प बात यह है कि इस हाई-प्रोफाइल विवाद का असर हेले के सोशल मीडिया अकाउंट पर भी देखने को मिला है। विवाद से पहले माइक्रोब्लॉगिंग साइट 'एक्स' (ट्विटर) पर उनके महज 800 फॉलोवर्स थे, लेकिन इस घटना के बाद कुछ ही घंटों में उनकी लोकप्रियता का ग्राफ तेजी से बढ़ा और अब उनके फॉलोवर्स की संख्या 27,000 के आंकड़े को पार कर चुकी है।

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