कांग्रेस ने रोका दिल्ली में आप का विजय रथ ?
नई दिल्ली । कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवारों ने दिल्ली की प्रमुख सीटों पर आम आदमी पार्टी के उम्मीदवारों का खेल बिगाड़ दिया। अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, सौरभ भारद्वाज , सोमनाथ भारती जैसे दिग्गज नेताओं की हार में कांग्रेस के उम्मीदवारों का भी बड़ा योगदान रहा है। कांग्रेस के उम्मीदवारों ने कम से कम 11 सीटों पर आम आदमी पार्टी का खेल बिगाड़ा है।
कांग्रेस को 2.2 प्रतिशत वोट का लाभ हुआ है। पिछले चुनाव में कांग्रेस को जहां 4.20 प्रतिशत वोट मिले थे वहीं इस चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवारों को 6.40 प्रतिशत वोट मिले। वहीं अगर बात करें आम आदमी पार्टी और बीजेपी के वोट प्रतिशत में अंतर का तो बीजेपी को इस चुनाव में बीजेपी को 45.69 प्रतिशत वोट मिले हैं वहीं आम आदमी पार्टी को 43.54 प्रतिशत वोट मिले हैं। दोनों के वोट के अंतर को देखा जाए तो कांग्रेस के बढ़े हुए वोट को अगर जोड़ा जाए तो आंकड़ा आस-पास पहुंच सकता है।
दिल्ली में बीजेपी 27 साल से दिल्ली में वनवास पर थी। कांग्रेस के बाद भगवा रथ को दिल्ली में करप्शन के मुद्दे पर प्रचंड बहुमत से सत्ता में आए केजरीवाल ने रोके रखा। बीजेपी लोकसभा चुनाव में दिल्ली जीतती और विधानसभा चुनाव में हार जाती थी। लेकिन 8 फरवरी 2025 को बीजेपी के लिए सब बदल गया। 2024 में बीजेपी ने लोकसभा चुनाव जीता। दिल्ली की सभी सात सीटों पर लगातार तीसरी बार कब्जा किया और 11 महीने बाद भी भगवा रंग फीका नहीं होने दिया।

सैकड़ों साल पुरानी कब्र ने खोले इतिहास के नए राज, वैज्ञानिक भी हुए हैरान
हेयरफॉल से राहत पाने के लिए लोग अपना रहे हैं यह तरीका, जानें कितना कारगर है
Q1 नतीजों से Nestle India को मिला बूस्ट, ₹959 करोड़ के मुनाफे के बाद चढ़ा शेयर
रिश्तों का सबसे खौफनाक अंत! जिन बेटों के लिए की प्रार्थना, उन्हीं ने मां-बाप की ले ली जान
छात्र आंदोलन पर नसीरुद्दीन शाह का तीखा रिएक्शन, दिल्ली पुलिस पर साधा सीधा निशाना
पीएम मोदी से शरद पवार की मुलाकात, महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चाएं तेज
हॉलीवुड की उभरती स्टार केली हॉटल का सड़क हादसे में निधन, 18 साल की उम्र में टूटा सपना
शारदा उफान पर, लखीमपुर खीरी में बाढ़ ने बढ़ाई मुश्किलें; कई गांव टापू में तब्दील
संसद परिसर से सदन तक घमासान, हंगामे के बाद दोनों सदनों की कार्यवाही रोकी गई
भारत-जिम्बाब्वे T20 से पहले जानें हरारे की पिच का हाल, टॉस जीतकर क्या होगा सही फैसला?