न्यूक्लियर साइट्स पर निरीक्षण को लेकर ईरान का रुख स्पष्ट, पहले समझौता फिर पहुंच
तेहरान: ईरान के परमाणु संयंत्रों की जांच संयुक्त राष्ट्र (UN) की परमाणु एजेंसी करेगी या नहीं, इसे लेकर वैश्विक स्तर पर बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। तमाम दावों के बीच ईरान ने एक बार फिर अपना रुख साफ करते हुए कहा है कि संयुक्त राष्ट्र के परमाणु निरीक्षकों को उसके परमाणु स्थलों (न्यूक्लियर साइट्स) पर जाने की इजाजत केवल अमेरिका के साथ एक अंतिम और पूर्ण समझौता होने के बाद ही दी जाएगी। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' के जरिए अपनी बात रखी है।
प्रतिबंध हटने पर ही मिलेगी परमाणु स्थलों तक पहुंच
ईरान के उप विदेश मंत्री गरीबाबादी ने स्पष्ट किया कि यूएन निरीक्षकों की पहुंच और परमाणु सामग्री से जुड़े सभी मुद्दों को केवल अंतिम समझौते के दायरे में ही सुलझाया जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह पूरी प्रक्रिया इस बात पर निर्भर करती है कि दूसरा पक्ष (अमेरिका और उसके सहयोगी) ईरान पर लगे सभी आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने के लिए कितने व्यावहारिक और ठोस कदम उठाता है। गरीबाबादी ने यह भी खुलासा किया कि स्विट्जरलैंड में हुई हालिया बातचीत के दौरान अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफेल ग्रोसी के अनुरोध के बावजूद ईरान के किसी भी अधिकारी ने उनसे मुलाकात नहीं की।
राफेल ग्रोसी और अमेरिका के दावों पर ईरान का पलटवार
दूसरी तरफ, टोक्यो में मौजूद आईएईए (IAEA) के प्रमुख राफेल ग्रोसी ने दृढ़ता से कहा है कि ईरान के परमाणु स्थलों का निरीक्षण हर हाल में होकर रहेगा। उन्होंने कहा कि यह जांच आज हो, परसों हो, एक हफ्ते या दस दिनों में हो—यह अलग बात है, लेकिन यह निश्चित रूप से होगी। इससे पहले अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी दावा किया था कि ईरान अपनी न्यूक्लियर साइट्स पर आईएईए के निरीक्षकों को वापस बुलाने के लिए राजी हो गया है। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने अमेरिकी दावों को खारिज करते हुए साफ किया कि ग्रोसी के साथ उनकी कोई बैठक नहीं हुई है और न ही निरीक्षण के लिए कोई समय-सीमा तय की गई है।
साल 2025 के संघर्ष के बाद से लगी है पाबंदी
दरअसल, जून 2025 में हुए सैन्य संघर्ष के बाद से ही तेहरान (ईरान) ने आईएईए को अपने उन यूरेनियम संवर्धन स्थलों (एनरिचमेंट साइट्स) की जांच करने से पूरी तरह रोक दिया था, जहां माना जाता है कि उसने बहुत बड़े पैमाने पर उच्च स्तर का संवर्धित यूरेनियम इकट्ठा कर लिया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस सामग्री से ईरान चाहे तो करीब 10 परमाणु हथियार तैयार कर सकता है। हालांकि, इन आरोपों के बीच ईरान लंबे समय से दुनिया के सामने यही दावा करता आया है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण और ऊर्जा जरूरतों के लिए है।

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