IMS BHU भर्ती में गड़बड़ी का आरोप, एक ही सेंटर से दो अभ्यर्थियों के सर्टिफिकेट पर सवाल
वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के चिकित्सा विज्ञान संस्थान (आईएमएस) में हाल ही में आउटसोर्सिंग के जरिए हुई 22 नियुक्तियों को लेकर हंगामा बढ़ता जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन और उच्चाधिकारियों तक पहुंची शिकायतों के बाद अब चयनित उम्मीदवारों के योग्यता प्रमाणपत्रों को लेकर नए दावे किए जा रहे हैं। आशंका जताई जा रही है कि यदि इन दस्तावेजों की गहनता से जांच हुई, तो बड़े पैमाने पर अनियमितताएं उजागर हो सकती हैं।
संस्थान के विभिन्न विभागों में कंप्यूटर प्रोफेशनल, कंप्यूटर स्किल्ड वर्कर, एसी मैकेनिक, ओटी टेक्नीशियन, बॉडी लिफ्टर और ऑडियोमेट्री जैसे कुल 22 पदों पर भर्ती की गई है। इस मामले में सबसे पहले तब सवाल उठे जब एक ही परिवार के तीन सदस्यों (एक भाई और दो बहनों) के चयन की बात सामने आई। जानकारी के अनुसार, दोनों बहनों को कंप्यूटर प्रोफेशनल और भाई को कंप्यूटर स्किल्ड वर्कर के पद पर नियुक्त किया गया है।
प्रमाणपत्रों में विसंगतियों के आरोप
ताजा जानकारी के मुताबिक, चयनित दो बहनों ने कंप्यूटर डिप्लोमा के जो सर्टिफिकेट जमा किए हैं, वे वाराणसी के चांदपुर लोहता स्थित एक ही निजी संस्थान द्वारा साल 2019 में जारी किए गए बताए जा रहे हैं। इसके अलावा, एक अन्य उम्मीदवार पर आरोप है कि उसने जरूरी स्किल्ड सर्टिफिकेट की जगह हाईस्कूल के ग्रेस मार्क्स (अंकों की छूट) से जुड़ा दस्तावेज लगा दिया है। कुछ मामलों में यह भी देखा गया है कि उम्मीदवारों ने एक ही शैक्षणिक वर्ष में हाईस्कूल और डिप्लोमा, दोनों डिग्रियां हासिल करने का दावा किया है, जो नियमों के विरुद्ध है।
जांच के घेरे में भर्ती प्रक्रिया
इस पूरे प्रकरण की औपचारिक शिकायत 11 जून को विश्वविद्यालय प्रशासन से की गई थी, जिसके बाद 12 जून को इसे सरकारी जन शिकायत पोर्टल पर भी दर्ज कराया गया है। शिकायत दर्ज होने के बाद अब इस मामले की आधिकारिक जांच शुरू होने की प्रबल संभावना है।
हालांकि, आईएमएस बीएचयू के निदेशक प्रो. एस.एन. संखवार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि संस्थान में होने वाली सभी भर्तियां निर्धारित नियमों के तहत एक विशेष समिति की देखरेख में की जाती हैं। फिलहाल, सभी की नजरें इस संभावित जांच और उसके आने वाले परिणामों पर टिकी हुई हैं।

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