टीएमसी में टूट की अटकलों के बीच आदित्य ठाकरे का बड़ा बयान, बागियों को सुनाई खरी-खरी
मुंबई। शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता आदित्य ठाकरे ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर बगावत का बिगुल फूंकने वाले जनप्रतिनिधियों पर तीखा हमला बोला है। अपनी पार्टी में हुए पिछले विभाजन का दर्द साझा करते हुए उन्होंने विद्रोहियों को कायर और एहसानफरामोश करार दिया। उन्होंने कहा कि जो लोग पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के प्रति वफादार नहीं रह सके, वे अब दल छोड़कर भाग रहे हैं। ठाकरे ने शुक्रवार को बागी नेताओं को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि ये लोग पार्टी और ममता दीदी के योगदान को भूल चुके हैं। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली शिकस्त के बाद टीएमसी के विधायकों और सांसदों के एक बड़े धड़े ने बगावत कर दी है और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली तथा सांगठनिक फैसलों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
टीएमसी के भीतर सांसदों और विधायकों का दोहरा विद्रोह
तृणमूल कांग्रेस के भीतर यह अंदरूनी कलह उस समय दिल्ली तक पहुंच गई, जब पार्टी की मुख्य सचेतक काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में लोकसभा के 20 सांसदों ने स्पीकर ओम बिरला को एक औपचारिक पत्र सौंपा। इस पत्र में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन को समर्थन देने वाले एक पृथक गुट के रूप में मान्यता देने की मांग की, जिसने संसदीय दल को दो धड़ों में बांट दिया है। इसके साथ ही राज्यसभा के तीन सांसदों ने भी अपने पदों से त्यागपत्र दे दिया है। संसद से पहले यह विद्रोह बंगाल विधानसभा में भी देखने को मिला था, जहां टीएमसी के कुल 80 विधायकों में से 58 ने आधिकारिक उम्मीदवार शोवनदेब चट्टोपाध्याय का विरोध करते हुए निष्कासित विधायक ऋतब्रता बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष के रूप में अपना समर्थन दे दिया।
1998 में गठन के बाद से सबसे बड़े संकट में ममता बनर्जी
इन दोनों बड़े विद्रोहों ने ममता बनर्जी की पार्टी को एक ऐसे दोराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है, जिसे राजनीतिक विश्लेषक वर्ष 1998 में पार्टी की स्थापना के बाद का सबसे भीषण सांगठनिक संकट मान रहे हैं। इस घटनाक्रम ने उस दल के भीतर की गहरी खाई को पूरी दुनिया के सामने उजागर कर दिया है, जिसने पिछले डेढ़ दशक से भी अधिक समय से पश्चिम बंगाल की सत्ता और राजनीति पर एकछत्र राज किया है। इस बीच, टीएमसी के वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी द्वारा अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व पर उंगली उठाने और ममता बनर्जी को अपने भतीजे या पुराने वफादार नेताओं में से किसी एक को चुनने की खुली चेतावनी देने के मामले पर भी राजनीतिक बाजार गर्म है।
अविभाजित शिवसेना के विभाजन का दर्द और न्याय की उम्मीद
आदित्य ठाकरे ने टीएमसी के इस आंतरिक घटनाक्रम को देश की बिगड़ती राजनीतिक शुचिता का परिचायक बताया। उन्होंने बागियों पर बरसते हुए कहा कि जो लोग स्वार्थी और डरपोक हैं तथा जिन्हें कार्यकर्ताओं के खून-पसीने की कोई कद्र नहीं है, वही संकट के समय पार्टी को धोखा दे रहे हैं। महाराष्ट्र के सियासी घटनाक्रम का हवाला देते हुए ठाकरे ने अंत में कहा कि यदि वर्ष 2022 में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली अविभाजित शिवसेना के साथ हुए धोखे के मामले में अदालत से समय पर उचित न्याय मिल गया होता, तो आज देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था इस निचले स्तर तक नहीं पहुंचती। उन्होंने उम्मीद जताई कि न्यायपालिका इस संवैधानिक मुद्दे पर जल्द ही उचित फैसला सुनाएगी।

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