पेपर कप में चाय पीने की आदत बदलने का समय? सेहत पर पड़ सकते हैं ये असर
सुबह की शुरुआत करनी हो या दफ्तर के काम के बीच का ब्रेक, भारत में चाय प्रेमियों की तादाद हर जगह है। आजकल नुक्कड़ की चाय थड़ियों से लेकर बड़े-बड़े कॉर्पोरेट ऑफिसों तक में चाय-कॉफी परोसने के लिए पेपर कप (कागज के गिलासों) का चलन बहुत तेजी से बढ़ा है। ज्यादातर लोग इसे प्लास्टिक कप के मुकाबले सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल (इको-फ्रेंडली) मानते हैं। लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स ने इसे लेकर एक चौंकाने वाली चेतावनी जारी की है। विशेषज्ञों के अनुसार, अधिकांश पेपर कपों के अंदरूनी हिस्से में लिक्विड को रोकने के लिए एक बेहद पतली प्लास्टिक या केमिकल की कोटिंग की जाती है, जो गर्म चाय के संपर्क में आते ही पिघलकर हमारे शरीर में पहुंच जाती है।
आइए जानते हैं कि पेपर कप में चाय पीना हमारी सेहत को किस तरह नुकसान पहुंचा रहा है:
1. शरीर में जा रहे हैं 'माइक्रोप्लास्टिक' के सूक्ष्म कण
पेपर कप को वॉटरप्रूफ बनाने के लिए उसके अंदर पॉलीथीन की एक बारीक परत लगाई जाती है। जब इस कप में खौलती हुई गर्म चाय या कॉफी डाली जाती है, तो गर्मी के कारण उस परत से अरबों सूक्ष्म प्लास्टिक कण (माइक्रोप्लास्टिक) टूटकर पेय पदार्थ में मिल जाते हैं। चाय के साथ ये कण हमारे शरीर के अंदर जाकर जमा होने लगते हैं, जो आगे चलकर आंतरिक अंगों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
2. हानिकारक रसायनों (केमिकल्स) का टॉक्सिक खतरा
प्लास्टिक परत के अलावा, इन कपों को आपस में चिपकाने और आकर्षक बनाने के लिए कुछ खास तरह के रसायनों और रंगों का इस्तेमाल किया जाता है। अत्यधिक तापमान के संपर्क में आते ही ये जहरीले रसायन चाय में घुल जाते हैं। लंबे समय तक ऐसे कपों में चाय पीने से पाचन तंत्र और पेट से जुड़ी गंभीर बीमारियां होने की आशंका बढ़ जाती है।
3. हार्मोनल असंतुलन की बड़ी आशंका
चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि प्लास्टिक कोटिंग से निकलने वाले केमिकल शरीर के एंडोक्राइन सिस्टम (हार्मोन प्रणाली) को बुरी तरह प्रभावित कर सकते हैं। इससे शरीर का प्राकृतिक हार्मोनल संतुलन बिगड़ सकता है, जो पुरुषों और महिलाओं दोनों में कई तरह की शारीरिक दिक्कतों की वजह बन सकता है।
4. रीसाइक्लिंग न होने से पर्यावरण को भी नुकसान
भले ही इन्हें 'पेपर कप' कहा जाता है, लेकिन प्लास्टिक मिक्स होने के कारण इन्हें पूरी तरह से रीसाइकल (पुनर्चक्रण) करना नामुमकिन होता है। इस्तेमाल के बाद फेंके गए ये करोड़ों कप कचरे के ढेर में तब्दील हो रहे हैं, जिससे पर्यावरण प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग की समस्या और गंभीर होती जा रही है।
बचाव के लिए क्या करें? (सुरक्षित विकल्प)
कुल्हड़ या कांच को अपनाएं: चाय पीने के लिए मिट्टी के पारंपरिक कुल्हड़, कांच के गिलास या घर/ऑफिस से लाए गए स्टील के कप को ही प्राथमिकता दें।
लंबे समय तक न रखें: अगर किसी मजबूरी में पेपर कप का इस्तेमाल करना भी पड़े, तो गर्म चाय को उसमें बहुत देर तक न छोड़ें, तुरंत पी लें।
जांचकर ही खरीदें: कैंटीन या दुकानों पर केवल वही पेपर कप इस्तेमाल करें जो फूड-ग्रेड और उच्च गुणवत्ता प्रमाणित (सर्टिफाइड) हों।

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