आईसीएआर-एनआईबीएसएम द्वारा किसानों को उन्नत धान बीजों का वितरण
रायपुर : आईसीएआर–राष्ट्रीय जैविक स्ट्रैस प्रबंधन संस्थान (ICAR-NIBSM), रायपुर द्वारा अनुसूचित जाति उपयोजना (SCSP) के अंतर्गत धान बीज वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के माध्यम से पचेड़ा, बेलटुकरी एवं बिठिया गांवों के 170 से अधिक किसानों को उन्नत धान बीज उपलब्ध कराए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों के बीच उन्नत धान किस्मों तथा वैज्ञानिक फसल प्रबंधन तकनीकों को बढ़ावा देकर कृषि उत्पादकता एवं किसानों की आय में वृद्धि करना है ।
इस अवसर पर संस्थान के निदेशक डॉ. पी. के. राय ने किसानों को संबोधित करते हुए सतत कृषि उत्पादन के लिए उर्वरकों के संतुलित एवं विवेकपूर्ण उपयोग के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि फसल की आवश्यकता एवं मृदा स्वास्थ्य के आधार पर पोषक तत्वों का उचित प्रबंधन न केवल उत्पादन बढ़ाने में सहायक होता है, बल्कि मृदा की उर्वरता बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने आगामी खरीफ मौसम के लिए किसानों को प्रभावी पोषक तत्व प्रबंधन संबंधी महत्वपूर्ण सुझाव दिए, जिससे अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सके।
कार्यक्रम के दौरान किसानों को धान की दो उन्नत किस्मों के बीज वितरित किए गए। पहली किस्म विक्रम टीसीआर (Vikram TCR) है, जो 120–130 दिनों में पकने वाली उच्च उत्पादकता वाली किस्म है तथा इसकी उत्पादन क्षमता 60–70 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक है। दूसरी किस्म सीजी देवभोग (CG Devbhog) है, जो 135–140 दिनों में पकने वाली मध्यम अवधि की सुगंधित धान किस्म है तथा इसकी औसत उत्पादन क्षमता 35–37 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। अपनी विशिष्ट सुगंध एवं उत्तम दाना गुणवत्ता के कारण सीजी देवभोग उपभोक्ताओं के बीच अत्यंत लोकप्रिय है और किसानों के लिए बेहतर विपणन अवसर प्रदान करती है।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. पंकज शर्मा, संयुक्त निदेशक एवं कार्यक्रम समन्वयक ने किसानों को धान की वैज्ञानिक नर्सरी तैयार करने एवं रोपाई की उन्नत विधियों की जानकारी दी। उन्होंने ऐसी बेहतर प्रबंधन तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की, जिनके माध्यम से किसान कीटों एवं रोगों से होने वाली हानि को कम करते हुए अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने किसानों को लाभकारी एवं टिकाऊ धान उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए उन्नत कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।
बीज वितरण कार्यक्रम से पूर्व किसानों ने संस्थान के प्रायोगिक खेत का भ्रमण किया, जहां उन्होंने ग्रीष्मकालीन मूंग में संचालित हरी खाद (ग्रीन मैन्योरिंग) के प्रदर्शन का अवलोकन किया। इस अवसर पर डॉ. योगेश येले एवं डॉ. संदीप अडावी ने हरित खाद के महत्व एवं इसके लाभों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हरित खाद मृदा में कार्बनिक पदार्थों की मात्रा बढ़ाने, पोषक तत्वों की उपलब्धता में सुधार करने तथा दीर्घकालिक मृदा स्वास्थ्य को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने किसानों को यह भी अवगत कराया कि हरित खाद का उपयोग संस्थान द्वारा संचालित "खेत बचाओ अभियान" का एक महत्वपूर्ण घटक है, जिसका उद्देश्य पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों के माध्यम से मृदा स्वास्थ्य का संरक्षण एवं पुनर्स्थापन करना है।
किसानों ने गुणवत्तापूर्ण बीजों की समय पर उपलब्धता एवं संस्थान द्वारा प्रदान किए गए तकनीकी मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त किया। लाभार्थी किसानों ने विश्वास व्यक्त किया कि उन्नत किस्मों एवं वैज्ञानिक सलाह से उन्हें फसल उत्पादकता बढ़ाने तथा अपनी आजीविका को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. के. सी. शर्मा, नोडल अधिकारी द्वारा किया गया, जिसमें संस्थान के वैज्ञानिकों एवं कर्मचारियों का सक्रिय सहयोग प्राप्त हुआ।

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