2 साल से न्याय की आस में भटक रहा मांझी परिवार, जमीन पर कब्जे का आरोप
सरगुजा: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के मैनपाट अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत कुनिया से भू-माफियाओं और दबंगों के हौसले बुलंद होने का एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां रहने वाले माझी जनजाति के पीड़ित परिवार वन अधिकार का सरकारी पट्टा होने के बावजूद अपनी ही जमीन के लिए तरस रहे हैं। दबंगों द्वारा उनकी पैतृक भूमि पर अवैध कब्जा कर लिया गया है, जिसे खाली कराने के लिए यह आदिवासी परिवार पिछले दो वर्षों से लगातार जिला मुख्यालय में आयोजित होने वाले कलेक्टोरेट जनदर्शन के चक्कर काट रहा है, लेकिन अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
मारपीट और धमकी देकर पुश्तैनी जमीन से बेदखल किया
अपनी इस गंभीर समस्या को लेकर माझी जनजाति के लोग एक बार फिर जिला कलेक्टर से मिलने पहुंचे। जनदर्शन में अपनी व्यथा बताते हुए पीड़ितों ने आवेदन सौंपा और अपनी जमीन वापस दिलाने की मांग की। पीड़ित आदिवासियों का कहना है कि वे कई पीढ़ियों से उस जमीन पर खेती-बाड़ी करके अपना जीवन यापन कर रहे थे और शासन द्वारा उन्हें वन अधिकार अधिनियम के तहत बाकायदा पट्टा भी दिया गया है। इसके बावजूद गांव के ही कुछ रसूखदार दबंगों ने उनके साथ लाठी-डंडे से मारपीट की और जान से मारने की धमकी देकर जमीन पर जबरन कब्जा कर लिया। अब जब भी वे अपनी जमीन वापस मांगते हैं, तो उनके साथ गाली-गलौज और विवाद किया जाता है।
तहसील कोर्ट से भी नहीं मिली राहत, रामपुकार समेत कई लोगों पर आरोप
हैरानी की बात यह है कि इस जमीन का विवाद स्थानीय तहसील न्यायालय में भी चला, लेकिन वहां से भी इस गरीब परिवार को कोई न्याय नहीं मिल सका। यही वजह है कि थक-हारकर कुनिया ग्राम पंचायत के निवासी फागु माझी और मुन्नाराम माझी ने सीधे कलेक्टर की चौखट पर न्याय की गुहार लगाई है। सौंपे गए शिकायती पत्र में उन्होंने साफ तौर पर गांव के ही राम पुकार यादव, नरेश यादव और अनूप यादव पर अपनी पट्टे की जमीन हड़पने का संगीन आरोप लगाया है। पीड़ितों ने बताया कि आरोपियों ने आदिवासियों की भूमि के साथ-साथ गांव की 'गोचर मद' (मवेशियों के चरने की चरागाह भूमि) पर भी अवैध कब्जा जमा लिया है।
राजस्व अमले की मिलीभगत से कागजों में हेरफेर की आशंका
स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक, मैनपाट के पर्वतीय और आदिवासी अंचलों में सरकारी जमीनों और गरीब आदिवासियों की जमीनों पर अवैध कब्जे के दर्जनों मामले लगातार सामने आ रहे हैं। प्रशासनिक स्तर पर इन संवेदनशील मामलों की त्वरित सुनवाई न होने के कारण फाइलें सालों तक दफ्तरों में धूल फांकती रहती हैं। आरोप है कि क्षेत्र के कुछ दबंग लोग राजस्व विभाग (पटवारी और कोटवार) के निचले कर्मचारियों की मिलीभगत से सरकारी दस्तावेजों और खसरे में भी हेरफेर करवा रहे हैं, जिसके कारण अशिक्षित और सीधे-साधे आदिवासियों को अपने कानूनी हक से हाथ धोना पड़ रहा है। आदिवासियों ने कलेक्टर से इस पूरे रैकेट की जांच कराकर अपनी भूमि वापस दिलाने की मांग की है।

इरादों की स्याही से किशन जंगम ने लिखी सफलता की नई इबारत
स्वतंत्रता दिवस समारोह-2026 की तैयारियां प्रारंभ
मुख्यमंत्री डॉ. यादव पन्ना में 204 करोड़ रूपए से अधिक राशि के 22 विकास कार्यों की देंगे सौगात
संसद में NEET विवाद पर बढ़ा सियासी टकराव, राहुल गांधी की बैठक से क्या निकलेगा हल?
CJP प्रोटेस्ट विवाद: सरकार ने कहा- संवाद के रास्ते खुले, 4 बार भेजा बातचीत का न्योता
हापुड़ में 6 साल की बच्ची से कथित दुष्कर्म प्रयास, पुलिस ने दर्ज किया केस
शिक्षा पर कितना निवेश, कितना बदलाव? मोदी सरकार के 12 साल का डेटा आया सामने
झाबुआ रेल विवाद: 6 घंटे इंतजार के बाद यात्रियों ने रोका ट्रैक, बोले- लोकल को दी जा रही प्राथमिकता
'युवा सीधे संवाद चाहते हैं', विक्रमादित्य सिंह ने PM मोदी को दिया सुझाव