इंडिया ब्लॉक बैठक में अनुपस्थिति, थलापति विजय के कदम पर सवाल
नई दिल्ली: नई दिल्ली में आयोजित INDIA गठबंधन की अहम बैठक से तमिल सुपरस्टार और तमिलनाडु के नवनियुक्त मुख्यमंत्री थलापति विजय की पार्टी 'तमिलगा वेट्री कझगम' (TVK) की दूरी और उन्हें आमंत्रण न मिलने के पीछे कई बड़े राजनीतिक और तकनीकी कारण हैं।
इस सियासी समीकरण और विजय की दूरी की मुख्य वजहों को इस तरह समझा जा सकता है:
1. संसद में कोई प्रतिनिधित्व (सांसद) न होना
कांग्रेस नेतृत्व और गठबंधन के नेताओं ने स्पष्ट किया है कि दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में हुई यह बैठक मुख्य रूप से उन विपक्षी दलों के लिए थी, जिनका संसद (लोकसभा या राज्यसभा) में प्रतिनिधित्व है। यह बैठक संसद के भीतर सरकार को घेरने और राष्ट्रीय स्तर की रणनीति बनाने के लिए बुलाई गई थी। चूंकि विजय की पार्टी TVK ने हाल ही में तमिलनाडु विधानसभा चुनाव जीता है और अब तक कोई लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा है, इसलिए वर्तमान में संसद में उनका कोई सांसद नहीं है।
2. INDIA गठबंधन का औपचारिक हिस्सा न होना
भले ही तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद विजय की पार्टी ने कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाई है, लेकिन TVK औपचारिक (Officially) रूप से राष्ट्रीय स्तर पर INDIA गठबंधन का हिस्सा नहीं बनी है। कांग्रेस और TVK का यह गठबंधन केवल तमिलनाडु की राज्य स्तर की राजनीति तक सीमित है। ऐसे में जो दल राष्ट्रीय मोर्चे का औपचारिक हिस्सा ही नहीं है, उसे इस बैठक में शामिल नहीं किया गया।
3. DMK और कांग्रेस के बीच का विवाद
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस ने अपने पुराने सहयोगी दल द्रमुक (DMK) का साथ छोड़कर थलापति विजय की TVK का समर्थन किया और सरकार में शामिल हो गई। कांग्रेस के इस कदम को DMK प्रमुख एम.के. स्टालिन ने "पीठ में छुरा घोंपना" और "विश्वासघात" करार दिया। इस सियासी तल्खी के कारण DMK ने INDIA गठबंधन की इस बैठक का पूरी तरह बहिष्कार कर दिया और गठबंधन से अलग होने का एलान कर दिया। ऐसे में अगर कांग्रेस बैठक में विजय की पार्टी को बुलाती, तो गठबंधन के भीतर क्षेत्रीय दलों के बीच दरार और ज्यादा बढ़ सकती थी।
4. स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बनाए रखने की रणनीति
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि थलापति विजय खुद को अभी से किसी राष्ट्रीय गठबंधन में पूरी तरह बांधना नहीं चाहते। वे अपनी पार्टी TVK को तमिलनाडु में एक स्वतंत्र और मजबूत क्षेत्रीय शक्ति के रूप में स्थापित करना चाहते हैं, न कि किसी बड़े राष्ट्रीय ब्लॉक के 'जूनियर पार्टनर' के रूप में। यही वजह है कि वे फिलहाल दिल्ली की राष्ट्रीय राजनीति से दूरी बनाकर चेन्नई में अपनी नई सरकार और राज्य की कानून व्यवस्था व विकास पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

इरादों की स्याही से किशन जंगम ने लिखी सफलता की नई इबारत
स्वतंत्रता दिवस समारोह-2026 की तैयारियां प्रारंभ
मुख्यमंत्री डॉ. यादव पन्ना में 204 करोड़ रूपए से अधिक राशि के 22 विकास कार्यों की देंगे सौगात
संसद में NEET विवाद पर बढ़ा सियासी टकराव, राहुल गांधी की बैठक से क्या निकलेगा हल?
CJP प्रोटेस्ट विवाद: सरकार ने कहा- संवाद के रास्ते खुले, 4 बार भेजा बातचीत का न्योता
हापुड़ में 6 साल की बच्ची से कथित दुष्कर्म प्रयास, पुलिस ने दर्ज किया केस
शिक्षा पर कितना निवेश, कितना बदलाव? मोदी सरकार के 12 साल का डेटा आया सामने
झाबुआ रेल विवाद: 6 घंटे इंतजार के बाद यात्रियों ने रोका ट्रैक, बोले- लोकल को दी जा रही प्राथमिकता
'युवा सीधे संवाद चाहते हैं', विक्रमादित्य सिंह ने PM मोदी को दिया सुझाव