सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार से मांगा जवाब, नोटिस के साथ लगाई फटकार
बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के भवन निर्माण से जुड़े बकाया भुगतान के विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने इस पूरे मामले में राज्य सरकार के ढुलमुल रवैये पर सख्त नाराजगी जताते हुए नोटिस जारी किया है। अदालत ने साफ शब्दों में कहा है कि न्यायिक और प्रशासनिक आदेशों के बावजूद ठेकेदार का भुगतान रोकना बेहद गंभीर मामला है और इसमें किसी भी तरह की देरी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
3 महीने में भुगतान न होने पर देना होगा अतिरिक्त ब्याज
मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के लोक निर्माण विभाग (PWD) और वित्त विभाग को कड़े निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने कहा कि संबंधित निर्माण ठेकेदार की पूरी बकाया राशि का भुगतान आगामी तीन महीनों के भीतर सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही अदालत ने यह शर्त भी जोड़ी है कि यदि तय समय सीमा के अंदर भुगतान नहीं किया गया, तो राज्य सरकार को मूल राशि के साथ 12 प्रतिशत का अतिरिक्त ब्याज भी चुकाना होगा।
न्यायालय ने जताई सख्त नाराजगी
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जब निर्माण कार्य पूरी तरह संपन्न हो चुका है और विभाग की तरफ से सभी जरूरी मंजूरियां (क्लियरेंस) भी दी जा चुकी हैं, तो इसके बाद भी भुगतान को लटकाए रखना समझ से परे है। अदालत ने इसे प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा उदाहरण बताते हुए कहा कि न्यायिक आदेशों की तामील में इस तरह की सुस्ती किसी भी सूरत में जायज नहीं ठहराई जा सकती।
ठेकेदार ने बयां किया अपना दर्द
याचिकाकर्ता (ठेकेदार) के वकील ने देश की सबसे बड़ी अदालत के सामने अपना पक्ष रखते हुए बताया कि हाई कोर्ट भवन के निर्माण कार्य का पूरा ऑडिट और हिसाब-किताब पहले ही फाइनल हो चुका है। संबंधित अथॉरिटी की ओर से पेमेंट क्लियरेंस की फाइल भी आगे बढ़ाई जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर राशि जारी नहीं की जा रही है। इस लेट-लतीफी के कारण ठेकेदार को गंभीर आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है।
अधिकारियों को अवमानना की कार्रवाई की चेतावनी
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में राज्य के आला अधिकारियों को दो टूक चेतावनी दी है कि यदि समय रहते ठेकेदार को उसकी राशि नहीं मिली, तो इसे सीधे तौर पर अदालत की अवमानना (कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट) माना जाएगा। ऐसी स्थिति में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ व्यक्तिगत रूप से अवमानना की कार्रवाई शुरू की जा सकती है। फिलहाल, सर्वोच्च न्यायालय ने छत्तीसगढ़ सरकार से इस पूरे मामले पर लिखित जवाब मांगा है, जिसके बाद शासन स्तर पर हड़कंप मच गया है।

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