GDP ग्रोथ अनुमान में कटौती, महंगाई से लेकर रोजगार तक आम आदमी पर पड़ सकता है असर
नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच भड़के सैन्य टकराव का सीधा असर अब भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार पर दिखने लगा है। वैश्विक रेटिंग एजेंसी 'फिच' ने भारत के आर्थिक विकास दर (जीडीपी ग्रोथ रेट) के अनुमान में कटौती कर एक नई चिंता पैदा कर दी है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर जारी इस भू-राजनीतिक तनाव और तनातनी का सीधा प्रभाव आम आदमी की जेब, घरेलू बजट और बैंकों से लिए गए लोन की ईएमआई (EMI) पर पड़ने की आशंका गहरा गई है।
वैश्विक एजेंसी फिच ने घटाई भारत की अनुमानित आर्थिक विकास दर
ग्लोबल रेटिंग एजेंसी फिच ने मौजूदा वित्त वर्ष (2026-27) के लिए भारत की जीडीपी विकास दर का अनुमान 6.7 प्रतिशत से घटाकर 6.4 प्रतिशत कर दिया है। एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले वित्त वर्ष में दर्ज की गई 7.4 फीसदी की बेहतरीन वृद्धि के बाद अब देश की आर्थिक गतिविधियों में थोड़ी नरमी का दौर देखा जाएगा। इस गिरावट का मुख्य असर चालू वित्त वर्ष की दूसरी और तीसरी तिमाहियों के दौरान सबसे ज्यादा महसूस होने की उम्मीद है। ध्यान रहे कि पिछले दिनों भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी देश की विकास दर के अनुमान को संशोधित कर 6.6 प्रतिशत कर दिया था।
होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से उपजा गहरा तेल संकट
आर्थिक मोर्चे पर आ रही इस सुस्ती की सबसे मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ा युद्ध और इसके कारण दुनिया भर में पैदा हुआ कच्चे तेल का संकट है। वैश्विक व्यापार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग 'होर्मुज जलडमरूमध्य' बीते 14 हफ्तों से पूरी तरह बंद पड़ा है और आगामी जुलाई महीने तक इसके खुलने के कोई आसार नहीं नजर आ रहे हैं। इस वजह से हालिया हफ्तों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतों में चार से पांच प्रतिशत की तेजी आई है। फिच का मानना है कि कच्चे तेल के बढ़ते दामों के चलते आम उपभोक्ताओं की वास्तविक आय प्रभावित हो रही है, जिससे बाजार में उनकी खरीदारी और खर्च करने की क्षमता कम होगी।
महंगाई दर बढ़ने का खतरा और लोन की किस्तें महंगी होने के आसार
फिच की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में भले ही इस वक्त थोक और खुदरा महंगाई नियंत्रण में दिख रही हो, लेकिन ईंधन की आसमान छूती कीमतों के चलते साल के अंत तक खुदरा महंगाई दर बढ़कर 5.3 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच सकती है। इसके साथ ही देश के कई राज्यों में पड़ रही प्रचंड गर्मी और अल नीनो के कारण कमजोर मानसून की आशंका ने खाद्यान्न संकट का जोखिम बढ़ा दिया है। इस संभावित महंगाई को नियंत्रित करने के लिए रिजर्व बैंक इस साल अपनी नीतिगत ब्याज दरों (रेपो रेट) को 5.25 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.5 प्रतिशत कर सकता है, जिसका सीधा मतलब यह होगा कि आम जनता के होम, कार और पर्सनल लोन की किस्तें (EMI) और अधिक महंगी हो जाएंगी। हालांकि, लंबे समय के परिप्रेक्ष्य में फिच ने उम्मीद जताई है कि आगामी वित्त वर्ष 2027-28 तक ऊर्जा संकट का प्रभाव कम होने के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था दोबारा 6.7 प्रतिशत की दर से छलांग लगाएगी।

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