वाशिंगटन: पश्चिम एशिया में जारी भीषण तनाव के बीच वैश्विक कूटनीति के मोर्चे से एक बेहद बड़ी खबर सामने आ रही है। ईरान की आधिकारिक फार्स न्यूज एजेंसी ने सनसनीखेज दावा किया है कि अमेरिका ने ईरान के साथ शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए पांच बेहद सख्त और बड़ी शर्तें सामने रखी हैं। इस गुप्त रिपोर्ट के मुताबिक, वॉशिंगटन ने साफ कर दिया है कि वह पूर्व में हुई बमबारी से ईरान को हुए भारी नुकसान का कोई भी मुआवजा नहीं देगा। इसके साथ ही सबसे बड़ी शर्त के रूप में अमेरिका ने मांग की है कि ईरान अपना 400 किलोग्राम संवर्धित यूरेनियम (एनरिच्ड यूरेनियम) तुरंत अमेरिकी प्रशासन को सौंप दे, ताकि उसके परमाणु हथियारों की क्षमता को पूरी तरह नियंत्रित किया जा सके।

एक परमाणु केंद्र की शर्त और फ्रीज संपत्ति पर अमेरिका का कड़ा रुख

अमेरिकी प्रस्तावों की कड़ियों को उजागर करते हुए रिपोर्ट में बताया गया है कि जो बाइडन प्रशासन चाहता है कि ईरान के भीतर भविष्य में केवल एक ही परमाणु अनुसंधान केंद्र को चालू रखने की अनुमति दी जाए, जबकि बाकी सभी केंद्रों को पूरी तरह से बंद करना होगा। इसके अलावा, आर्थिक मोर्चे पर भी ईरान को बड़ा झटका देते हुए अमेरिका उसकी अंतरराष्ट्रीय बैंकों में फ्रीज (जब्त) पड़ी विदेशी संपत्तियों में से महज 25 प्रतिशत से अधिक की राशि को जारी करने के पक्ष में बिल्कुल नहीं है। राजनीतिक मोर्चे पर वाशिंगटन की अंतिम शर्त यह है कि लेबनान सहित पश्चिम एशिया के तमाम मोर्चों पर जारी युद्ध को पूरी तरह खत्म करने का मसला केवल आपसी बातचीत के जरिए ही हल किया जाए। हालांकि, इन शर्तों को लेकर अभी तक अमेरिका या ईरान के विदेश मंत्रालयों की तरफ से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

ओमान सागर को अमेरिकी सेना की कब्रगाह बनाने की ईरानी धमकी और UAE पर ड्रोन हमला

इन शर्तों के बीच ईरान का रुख बेहद आक्रामक नजर आ रहा है और उसने अमेरिका को चेतावनी देते हुए सामरिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) की नाकाबंदी तुरंत खत्म करने की मांग की है। तेहरान ने साफ लफ्जों में धमकी दी है कि यदि यह नाकाबंदी नहीं हटाई गई, तो वे ओमान सागर को अमेरिकी नौसेना और सैनिकों की कब्रगाह में तब्दील कर देंगे। इस जुबानी जंग के बीच जमीन पर भी हालात तब बेहद विस्फोटक हो गए, जब संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के प्रतिष्ठित 'बराकाह परमाणु ऊर्जा संयंत्र' के ठीक बाहर एक रहस्यमयी ड्रोन हमला हुआ, जिससे वहां भीषण आग लग गई। सुरक्षा एजेंसियों की शुरुआती जांच की सुई सीधे तौर पर ईरान की तरफ घूम रही है, क्योंकि यह इतिहास में पहली बार है जब यूएई के किसी अति-संवेदनशील न्यूक्लियर प्लांट को सीधे निशाना बनाने का दुस्साहस किया गया है।

होर्मुज संकट पर भारत का कड़ा रुख, ट्रम्प का नया 20 साल वाला परमाणु फॉर्मूला

इस समुद्री तनाव के बीच वैश्विक व्यापार को सुचारू रखने के लिए भारत ने भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी आवाज बुलंद की है। संयुक्त राष्ट्र (UN) में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने दो टूक शब्दों में कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट जैसे वैश्विक व्यापारिक मार्ग में वाणिज्यिक जहाजों (कॉमर्शियल शिपिंग) की आवाजाही को रोकना पूरी तरह से अस्वीकार्य और अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ है। भारत की यह चिंता इसलिए भी जायज है क्योंकि जंग के इस माहौल के बीच मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला एलपीजी टैंकर 'सिमी' 20 हजार टन गैस लेकर सुरक्षित रूप से गुजरात के कांडला पोर्ट पहुंचा है और युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक ऐसे 15 एलपीजी जहाज अपनी जान जोखिम में डालकर भारत पहुंच चुके हैं। इस बीच, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी एक नया चौंकाने वाला प्रस्ताव देते हुए कहा है कि ईरान को स्थाई रोक के बजाय कम से कम 20 साल के लिए अपने पूरे परमाणु कार्यक्रम को सस्पेंड कर देना चाहिए, साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि तेहरान के पास सोचने का समय बहुत तेजी से खत्म हो रहा है।

नेतन्याहू और ट्रम्प के बीच सैन्य हमले पर गुप्त चर्चा, लेबनान में सीजफायर बेअसर

दूसरी तरफ, इजराइल और अमेरिका के शीर्ष नेतृत्व ने ईरान को चारों तरफ से घेरने की अपनी सैन्य तैयारियों को और तेज कर दिया है। इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और डोनाल्ड ट्रम्प ने रविवार को फोन पर एक बेहद गोपनीय और लंबी बातचीत की, जिसमें ईरान के खिलाफ आने वाले दिनों में किए जाने वाले संभावित बड़े सैन्य हमलों और युद्ध को दोबारा शुरू करने की रणनीतियों पर गहन मंथन हुआ। इस बातचीत के तुरंत बाद पीएम नेतन्याहू ने यरुशलम में अपने शीर्ष मंत्रियों—विदेश मंत्री गिदोन सार, रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज, वित्त मंत्री बेजालेल स्मोट्रिच और राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन ग्वीर—के साथ एक हाई-लेवल इमरजेंसी सुरक्षा बैठक बुलाई। अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों (एक्सिओस) की मानें तो ट्रम्प भी मंगलवार को अपने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के साथ सिचुएशन रूम में एक बड़ी बैठक करने जा रहे हैं जिसमें ईरान पर सीधे मिलिट्री एक्शन के विकल्पों को अंतिम रूप दिया जाएगा। इन तमाम बड़ी तैयारियों के बीच, संघर्ष विराम की तमाम अपीलों को दरकिनार करते हुए इजराइली सेना ने दक्षिणी लेबनान पर 30 से ज्यादा भीषण हवाई हमले किए हैं, जिसके कारण वहां हाहाकार मचा हुआ है और हजारों बेकसूर नागरिक अपनी जान बचाने के लिए सामूहिक पलायन को मजबूर हैं।