मुनाफा बढ़ने के बाद भी बाजार में बिकवाली, SBI शेयर धड़ाम
मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार का दिन सरकारी बैंकिंग क्षेत्र के लिए काफी उथल-पुथल भरा रहा, जहां देश के सबसे बड़े ऋणदाता भारतीय स्टेट बैंक के शेयरों में जोरदार गिरावट दर्ज की गई। हालांकि बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 की अंतिम तिमाही के दौरान अपने मुनाफे में बढ़ोतरी दर्ज की है और निवेशकों के लिए लाभांश की घोषणा भी की है, लेकिन इसके बावजूद बाजार बंद होने तक बैंक के शेयर लगभग 7 प्रतिशत तक लुढ़क गए। इस गिरावट का मुख्य कारण बैंक के प्रदर्शन का बाजार विश्लेषकों और निवेशकों की ऊंची उम्मीदों पर खरा न उतर पाना माना जा रहा है, जिससे निवेशकों ने मुनाफे के बावजूद बिकवाली को प्राथमिकता दी।
उम्मीदों से कम मुनाफे ने निवेशकों को किया निराश
मार्च तिमाही के दौरान एसबीआई का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर लगभग साढ़े पांच फीसदी की बढ़त के साथ 19,684 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया, लेकिन बाजार को इससे कहीं अधिक यानी लगभग 20,300 करोड़ रुपये के लाभ की अपेक्षा थी। यद्यपि बैंक की शुद्ध ब्याज आय में चार प्रतिशत का सुधार देखा गया और 17.35 रुपये प्रति शेयर के लाभांश का भी ऐलान हुआ, किंतु कमजोर ट्रेजरी आय और परिचालन प्रदर्शन में आई सुस्ती ने निवेशकों के उत्साह को ठंडा कर दिया। बाजार की इसी निराशा का असर शेयरों की कीमतों पर दिखा और बेहतर नतीजों के दावों के बीच भी बैंक के शेयर बिकवाली के दबाव से खुद को बचा नहीं पाए।
सरकारी बैंकिंग सूचकांक पर बिकवाली का गहरा असर
एसबीआई के शेयरों में आई इस बड़ी गिरावट ने न केवल बैंक के निवेशकों को प्रभावित किया, बल्कि पूरे सरकारी बैंकिंग क्षेत्र के मनोबल को भी कमजोर कर दिया है। निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स में तीन प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, जिसमें पंजाब एंड सिंध बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा जैसे अन्य प्रमुख सरकारी बैंकों के शेयरों में भी दो से तीन प्रतिशत तक की कमजोरी देखी गई। इस नकारात्मक रुख का असर बैंक निफ्टी और वित्तीय सेवाओं से जुड़े अन्य शेयरों पर भी साफ तौर पर दिखाई दिया, जिससे शुक्रवार को वित्तीय बाजार का पूरा परिदृश्य दबाव में नजर आया।
बाजार के आगामी रुख और वैश्विक कारकों पर टिकी नजर
आने वाले सप्ताह में शेयर बाजार की चाल कई महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़ों और कॉर्पोरेट नतीजों पर निर्भर करेगी, जिसमें मुख्य रूप से खुदरा और थोक मुद्रास्फीति के आंकड़े शामिल हैं। साथ ही सिप्ला, भारती एयरटेल और जेएसडब्ल्यू स्टील जैसी दिग्गज कंपनियों के तिमाही परिणामों के साथ-साथ एमएससीआई इंडेक्स में होने वाले बदलाव भी बाजार की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाएंगे। इसके अतिरिक्त निवेशकों की पैनी नजर ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव पर भी रहेगी, जो वैश्विक स्तर पर बाजार के मूड को प्रभावित कर सकते हैं।

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