पहली बार रख रहे हैं मोहिनी एकादशी का व्रत, तो जरूर जानें ये खास नियम, पूजा विधि और भगवान विष्णु को प्रसन्न करने का तरीका
वैशाख माह की शुक्ल पक्ष एकादशी यानी मोहिनी एकादशी इस बार फरीदाबाद में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाई जाएगी. भगवान विष्णु को समर्पित यह व्रत बेहद फलदायी माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से व्रत और पूजा करने से जीवन के दुख दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं. खासकर जो लोग पहली बार एकादशी का व्रत रखने जा रहे हैं उनके लिए इसके नियम जानना बेहद जरूरी है.
कब है मोहिनी एकादशी का व्रत
मोहिनी एकादशी का व्रत 27 अप्रैल सोमवार को रखा जाएगा. यह एकादशी केवल व्रत नहीं बल्कि जीवन को सही दिशा देने का एक माध्यम है. भगवान श्रीराम ने भी अपने गुरु वशिष्ठ से ऐसा व्रत बताने को कहा था जिससे पापों का नाश हो और दुखों से मुक्ति मिले. तब वशिष्ठ जी ने मोहिनी एकादशी का महत्व बताया.
क्या है पौराणिक कथा
महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य ने एक पौराणिक कथा सुनाते हुए बताया एक नगर में धनपाल नाम के एक वैश्य रहते थे. उनके पांच पुत्र थे जिनमें सबसे बड़ा पुत्र गलत संगति में पड़ गया. घर से निकाले जाने के बाद वह चोरी करने लगा और अंत में जंगल में भटकते हुए पशुओं का शिकार कर जीवन बिताने लगा. एक दिन संयोग से एक ऋषि के संपर्क में आने पर उसकी बुद्धि जागी. उसने अपने पापों से मुक्ति का उपाय पूछा. तब ऋषि ने उसे मोहिनी एकादशी का व्रत करने की सलाह दी. विधिपूर्वक व्रत करने के बाद उसका जीवन बदल गया.
मोहिनी एकादशी का संबंध भगवान विष्णु के मोहिनी अवतार से है
महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य ने बताया मोहिनी एकादशी का संबंध भगवान विष्णु के मोहिनी अवतार से है. समुद्र मंथन के दौरान भगवान ने मोहिनी रूप धारण कर देवताओं को अमृत पिलाया था. तभी से इस एकादशी का विशेष महत्व माना जाता है. यह व्रत व्यक्ति के पापों को हरता है और जीवन में सुख-समृद्धि लाता है. व्रत की शुरुआत दशमी तिथि से ही हो जाती है. इस दिन एक समय सात्विक भोजन करना चाहिए और ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए. एकादशी के दिन सुबह स्नान करके भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा करें. दिनभर फलाहार करें या अपनी श्रद्धा अनुसार निर्जल व्रत भी रख सकते हैं. केले, सेब, अमरूद, अनार जैसे फलों का सेवन किया जा सकता है. साथ ही कुट्टू के पकवान भी खाए जा सकते हैं.
व्रत के दौरान क्या न करें
महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य ने बताया व्रत के दौरान किसी की निंदा, चुगली या क्रोध से बचना चाहिए. पूरे दिन भगवान विष्णु के मंत्र ओम नमो भगवते वासुदेवाय का जाप करें. शाम को भजन-कीर्तन और जागरण करना अत्यंत शुभ माना जाता है. द्वादशी तिथि को विधिपूर्वक पूजा कर व्रत का पारण करना चाहिए.
व्रत से दूर होंगे दुख
महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य ने बताया फरीदाबाद वासियों के लिए यह एक सुनहरा अवसर है. महंत के अनुसार मोहिनी एकादशी का व्रत करने से तीनों प्रकार के दुख दैहिक, दैविक और भौतिक दूर होते हैं. जो भी श्रद्धा और नियम से यह व्रत करता है उसके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है.
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