बढ़ती अनिश्चितता से एक्सपोर्ट सेक्टर पर दबाव, व्यापार संतुलन बिगड़ने का खतरा
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया संकट से उपजी वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण मार्च के आंकड़ों में देश के वस्तु निर्यात में सात से आठ फीसदी की गिरावट आ सकती है। वहीं, 2025-26 में दो से तीन फीसदी की गिरावट की आशंका है। सरकार मार्च महीने के निर्यात के आंकड़े 15 अप्रैल को जारी करेगी।
फियो के अध्यक्ष बोले- निर्यात बुरी तरह प्रभावित
भारतीय निर्यात संगठनों के महासंघ (फियो) के अध्यक्ष एससी रल्हन ने कहा, अमेरिका और इस्राइल के 28 फरवरी को ईरान पर किए गए संयुक्त हमले ने पश्चिम एशिया को होने वाले देश के निर्यात को बुरी तरह प्रभावित किया है। इससे माल भाड़ा, हवाई परिवहन लागत और बीमा लागत बढ़ गई है। उन्होंने कहा, पश्चिम एशिया के देशों से तेल एवं गैस की आवाजाही में रुकावट के कारण इस्पात, प्लास्टिक और रबड़ जैसे कच्चे माल की कीमतों में भी वृद्धि हुई है। रल्हन ने कहा, वस्तुओं और सेवाओं को मिलाकर देखें तो भारत के कुल निर्यात में पांच से छह फीसदी की बढ़ोतरी होने की संभावना है।
मौजूदा संकट के बीच फियो अध्यक्ष ने सुझाव दिया कि सरकार को उच्च ब्याज दर, एडवांस ऑथोराइजेशन यानी शुल्क छूट योजना के तहत भुगतान को सरल बनाने पर ध्यान देना चाहिए। इसके अलावा, विदेश व्यापार महानिदेशालय और सीमा शुल्क के बीच नाम, वर्गीकरण एवं कोडिंग प्रणाली के मामले में सामंजस्य स्थापित करने जैसे मुद्दों पर भी फोकस करना चाहिए।

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