फंसे निर्यातकों के लिए सरकार सक्रिय, पोर्ट्स को पारदर्शिता के निर्देश
नई दिल्ली | पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत के महानिदेशालय शिपिंग ने देश के सभी बंदरगाहों को निर्देश दिया है। उन्होंने कहा है कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में फंसे निर्यातकों को दी जाने वाली रियायतों का पूरा लाभ पारदर्शी तरीके से पहुंचाया जाए।जारी सर्कुलर में कहा गया है कि कई मामलों में पोर्ट अथॉरिटीज की ओर से दी गई रियायतें जैसे डिटेंशन चार्ज, ग्राउंड रेंट और रीफर प्लग-इन शुल्क निर्यातकों तक समान रूप से नहीं पहुंच रही हैं। ऐसे में अब इन रियायतों को सीधे और पारदर्शी तरीके से संबंधित हितधारकों, जैसे फ्रेट फॉरवर्डर्स और NVOCCs के माध्यम से निर्यातकों तक पहुंचाना अनिवार्य किया गया है।
पोर्ट अथॉरिटीज को क्या जिम्मेदारी दी गई?
डीजी शिपिंग ने पोर्ट अथॉरिटीज को यह भी जिम्मेदारी दी है कि वे टर्मिनल स्तर पर इसकी निगरानी करें, ताकि किसी भी तरह की देरी या गड़बड़ी न हो और लाभ वास्तविक लाभार्थियों तक समय पर पहुंचे।
क्यों उठाया गया यह कदम?
यह कदम 497 करोड़ रुपये की निर्यात सुविधा हेतु लचीलापन और लॉजिस्टिक्स हस्तक्षेप (RELIEF) योजना के तहत निर्यातकों को राहत सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है, ताकि संकट के बीच व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित न हों।
शिपिंग लाइनों को क्या दिए गए निर्देश?
साथ ही, शिपिंग लाइनों को निर्देश दिया गया है कि वे शुल्क निर्धारण में पूरी पारदर्शिता और ऑडिट की सुविधा सुनिश्चित करें। डीजी शिपिंग ने यह भी कहा कि कार्गो पर लगाए जा रहे वार रिस्क प्रीमियम में बदलाव हुए हैं, जो पहले जारी निर्देशों के अनुरूप नहीं हो सकते। इस मुद्दे को बीमा कंपनियों के साथ उठाया जा रहा है।इसी बीच, ईरान के आसपास के समुद्री क्षेत्र में काम कर रहे भारतीय नाविकों के लिए भी सुरक्षा सलाह जारी की गई है। सलाह में कहा गया है कि तट पर मौजूद नाविक घर के भीतर रहें, संवेदनशील इलाकों से दूर रहें और भारतीय दूतावास के संपर्क में रहें।जहाजों पर तैनात कर्मियों को अनावश्यक रूप से किनारे पर जाने से बचने और सतर्क रहने की हिदायत दी गई है। डीजी शिपिंग ने सभी कर्मियों से आधिकारिक निर्देशों का पालन करने और लगातार संपर्क में रहने को कहा है।

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