स्वस्थ जीवन का आधार है इन्द्रियों पर नियंत्रण: राज्यपाल पटेल
भोपाल : राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि नेचुरोपैथी स्वस्थ जीवन की मार्गदर्शिका है। उन्होंने कहा कि मन चंचल होता है, उसे नियंत्रित करना ही स्वस्थ जीवन का आधार है। स्वस्थ जीवन के लिए इन्द्रियों पर नियंत्रण जरूरी है। प्रकृति ने शरीर को बनाने और बिगाड़ने की समान शक्ति मानव को दी है। राज्यपाल पटेल सोमवार को बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय के ज्ञान-विज्ञान सभागार में आरोग्य भारती की कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।
राज्यपाल पटेल ने कहा कि आयुर्वेद प्रकृति द्वारा प्रदान की गई औषधियों का विज्ञान है, जिसका प्रभाव भले ही धीरे-धीरे होता है, लेकिन उसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है। उन्होंने कहा वातावरण का हमारे शरीर पर प्रभाव पड़ता है। हमारे पूर्वज इसीलिए ऋतु अनुसार भोजन बदलते रहते थे। उन्होंने गुजरात के डांग क्षेत्र का उदाहरण देते हुए बताया कि अंचल में बहुत हरियाली है, वहाँ पर ट्रायबल आबादी रहती है, लेकिन इस क्षेत्र के ट्रायबल्स में सामान्यत: मिलने वाला अनुवांशिक रोग सिकल सेल रोग बहुत कम मिलता है। यह बताता है कि प्रकृति का मानव स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव होता है। उन्होंने स्वस्थ जीवन के लिए पानी अधिक पीने, तैलीय पदार्थ कम खाने, कम से कम 6 घंटे सोने और मिलेट के सेवन के लिए प्रेरित किया।
राज्यपाल पटेल ने कहा कि नेचुरोपैथी केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि हमारे जीवन जीने के दृष्टिकोण और समग्र जीवन शैली से गहराई से जुड़ा हुआ विषय है। उन्होंने कहा कि नेचुरोपैथी आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, गलत खान-पान, प्रदूषण और तनाव से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं का सरल, सुरक्षित और प्रभावी समाधान देती है। उन्होंने बताया कि प्रकृति के सिद्धांतों पर आधारित नेचुरोपैथी का मानना है कि यदि व्यक्ति प्रकृति के अनुरूप जीवन बिताए, तो अनेक रोगों से बच सकता है। वास्तव में नेचुरोपैथी केवल उपचार की पद्धति नहीं, बल्कि एक समग्र जीवन दर्शन है, जिसमें जल, वायु, सूर्य, मिट्टी और संतुलित आहार के माध्यम से शरीर की प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता को सशक्त बनाया जाता है।
राज्यपाल पटेल ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार भी स्वास्थ्य के क्षेत्र में जन जागरूकता बढ़ाने के लिए पोषण अभियान, आयुष्मान योजनाओं, योग एवं आयुष आधारित विभिन्न स्वास्थ्य शिविरों से लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है। विशेष रूप से ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में कुपोषण को कम करने, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच बढ़ाने तथा स्वच्छता जागरूकता की अनेक नई पहलें की हैं।
राज्यपाल ने सभी उपस्थित जनों से आग्रह किया कि वे प्रधानमंत्री मोदी के संकल्प—“स्वस्थ समाज और सशक्त राष्ट्र” की सिद्धि में सक्रिय सहयोग करें। नेचुरोपैथी के सिद्धांतों को अपने जीवन में अपनाकर, दूसरों को भी अपनाने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने समाज में स्वास्थ्य जागरूकता को बढ़ाने और प्राकृतिक जीवन शैली अपनाने की जनहितकारी पहल के लिए आरोग्य भारती को बधाई दी।
अशोक कुमार वार्ष्णेय ने कहा कि प्राकृतिक चिकित्सा के तार्किक, वैज्ञानिक आधार द्वारा जन जागृति के प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि विज्ञान के इस युग में चमत्कार के रूप में उपचार की सोच सही नहीं है। यह समझना होगा कि रोग होने और उसका उपचार करने—दोनों में समय लगता है। उन्होंने सभी चिकित्सकीय पद्धतियों के प्रति समन्वयकारी दृष्टिकोण रखने और सफलता के अनावश्यक दावों से बचने का परामर्श दिया।
कार्यशाला में कुलगुरु बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय एस.के. जैन ने स्वागत उद्बोधन दिया। कार्यशाला के समापन पर संत हिरदाराम योग एंड नेचर केयर संस्थान और बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय के योग विभाग द्वारा विभिन्न योग नृत्यों की प्रस्तुतियां दी गई।

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