संकट में कूटनीतिक पहल: रूस ने भारत को ईरान-अमेरिका के बीच मध्यस्थ बनने के लिए कहा
नई दिल्ली। मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति बहाली की कोशिशें तेज हो गई हैं। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव के कारण वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है। इस बीच रूस ने भारत की वैश्विक स्थिति को देखते हुए इस युद्ध को सुलझाने के लिए उससे मध्यस्थता करने की अपील की है। रूस का मानना है कि भारत इस दिशा में एक निर्णायक और सकारात्मक भूमिका निभा सकता है।
रूस के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों की कड़ी आलोचना की है। रूस ने इन हमलों को अकारण आक्रमण करार देते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की मांग की है। रूसी प्रवक्ता मारिया जाखारोवा ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में पैदा हुए गंभीर संकट का समाधान खोजने के लिए भारत जैसी प्रभावशाली शक्ति की आवश्यकता है। जाखारोवा के अनुसार, भारत एक जिम्मेदार राष्ट्र है और इस तनाव को कम करने में सक्षम है। गौरतलब है कि भारत ने भी हमेशा से विवादों को बातचीत और कूटनीति के माध्यम से सुलझाने की वकालत की है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ संयुक्त सैन्य कार्रवाई शुरू किए जाने के बाद से यह युद्ध अब चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। इस संघर्ष का सबसे बुरा असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है। इजरायली हमलों में ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड, जो दुनिया का सबसे बड़ा गैस फील्ड है, को निशाना बनाया गया है। इसके बाद कच्चे तेल की कीमतों में 6.3 प्रतिशत का उछाल आया और यह 109.95 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। वहीं, यूरोप में गैस की कीमतों में भी 9.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
भारत पर आर्थिक और रणनीतिक प्रभाव
भारत के लिए यह युद्ध दोहरी चुनौती लेकर आया है। भारत अपनी तेल और गैस की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा मध्य पूर्व के देशों, विशेषकर सऊदी अरब और यूएई से आयात करता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकाबंदी ने भारत की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को बाधित कर दिया है। हालांकि, भारत ने रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ाकर इस कमी की आंशिक भरपाई की कोशिश की है, लेकिन बढ़ती कीमतों और सप्लाई रूट में व्यवधान ने चिंताएं बढ़ा दी हैं। दूसरी ओर, ऐसी खबरें भी सामने आ रही हैं कि रूस ईरान को सैटेलाइट डेटा और उन्नत ड्रोन तकनीक मुहैया करा रहा है ताकि वह अमेरिकी बलों का मुकाबला कर सके। हालांकि, इन दावों की अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए पूरी दुनिया की निगाहें अब भारत के अगले कदम पर टिकी हैं।
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