इंदौर नगर निगम की सख्ती: राजस्व बढ़ाने घर-घर होगी माप-तौल
इंदौर : देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के लोगों पर टैक्स की तगड़ी मार पड़ने वाली है. आर्थिक तंगी से जूझ रहे नगर निगम इंदौर ने शहर की जनता पर तरह-तरह के टैक्स के लादना शुरू कर दिया है. नए टैक्स के रूप में यहां अब लोगों को घर के ओपन स्पेस पर भी टैक्स देना पड़ेगा. क्योंकि सालाना बजट में 8000 करोड़ रुपए का लेखा-जोखा दर्शाने वाली इंदौर नगर निगम के खाते में विकास कार्यों का भुगतान करने के लिए पैसा नहीं है.
टैक्स बढ़ाने के विरोध में उतरी कांग्रेस
इंदौर नगर निगम अपनी वर्तमान आय से खुद का खर्च उठा पाने की स्थिति में नहीं है. नगर निगम की प्लानिंग के अनुसार अब जनता पर घर के ओपन स्पेस पर भी टैक्स लगेगा. इसके लिए महापौर पुष्यमित्र और नगर निगम परिषद ने जनता पर इस टैक्स को लगाने की मंजूरी दे दी है. इंदौर की जनता अब को अब नए टैक्स का सामना करना पड़ेगा. हालांकि पहले की तरह विपक्षी दल कांग्रेस इस टैक्स को जनता पर जजिया कर बताते हुए वापस लेने की मांग कर रहा है.
संपत्तिकर में पहले से ही 63 परसेंट तक वृद्धि
मई 2024 में नगर निगम ने 71 वार्ड की शहर की 531 कॉलोनियों के संपत्ति कर के स्लैब की दर में प्रति वर्ग फीट पर टैक्स 10% तक बढ़ा दिया, जिस कारण शहर के हर आवासीय घर और व्यावसायिक इमारत पर संपत्ति कर में 63% तक की वृद्धि हो चुकी है. अब 2 साल बाद फिर नगर निगम ने टैक्स वसूली का नया विकल्प तलाशते हुए घर के खाली स्थान यानी एमओएस पर टैक्स लगाने की घोषणा कर दी है. इस टैक्स की वसूली के लिए सैकड़ों लोगों को नोटिस भी जारी कर दिए गए हैं.
राज्य सरकार ने ही नहीं दिए डेढ़ हजार करोड़
इंदौर नगर निगम को राज्य शासन से करीब डेढ़ हजार करोड़ रुपए की बकाया चुंगी कर लेना है. इंदौर नगर निगम द्वारा हर महीने 44 करोड़ रुपए की मांग के बवजूद 17 से 18 करोड़ रुपए ही मिल पा रहे हैं. नगर निगम को ठेकेदारों को विकास कार्यों के 300 करोड रुपये देना है. इसके भुगतान की व्यवस्था भी नगर निगम के पास नहीं है. इसके अलावा शहर में करीब डेढ़ हजार करोड़ रुपए के विकास कार्य चल रहे हैं, इसके भुगतान के लिए भी आर्थिक संकट है.
जमीन बेचकर हालात सुधारने के प्रयास
नगर निगम ने तमाम खर्चों का बोझ कम करने के लिए ये टैक्स लगाया है. नगर निगम ने माली हालत सुधारने के लिए लगभग 65000 स्कावयर फीट जमीन की ऑनलाइन बिक्री तैयारी की है लेकिन फिलहाल यह मामला टल गया है. नगर निगम परिषद ने स्विमिंग पूल की फीस और सार्वजनिक शौचालयों का उपयोग शुल्क भी बढ़ा दिया है. इस मामले में महापौर पुष्यमित्र भार्गव का कहना है "मध्य प्रदेश सरकार की नियमावली के अनुसार ही टैक्स वसूलने की प्लानिंग है."

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