न्यायालय की गरिमा पर सवाल: हाईकोर्ट में अवैध एंट्री, तीन पुलिसकर्मी निलंबित
लखनऊ|राजधानी लखनऊ में काकोरी थाने के दो दरोगा और एक सिपाही ने अनाधिकृत रूप से फिल्मी अंदाज में हाईकोर्ट में दबिश देने पहुंच गए। गौ-तस्करी की आरोपी महिला की गिरफ्तारी की कोशिश की। अधिवक्ता के चेंबर में बैठी महिला को साथ ले जाने का प्रयास किया। विरोध पर अधिवक्ताओं से भिड़ गए। अधिवक्ताओं ने उन्हें घेर लिया और पुलिस चौकी के सुपुर्द कर दिया। जांच में पता चला कि तीनों ने अंदर प्रवेश का पास भी नहीं बनवाया था। झूठ बोलकर अंदर आए थे। गेट पर एडवोकेट जनरल कार्यालय में जाने की बात बताई और अधिवक्ता के चेंबर में दबिश डाल दी। वहीं, पुलिस उपायुक्त पश्चिम विश्वजीत श्रीवास्तव ने तीनों को निलंबित कर दिया।अधिवक्ता सज्जाद हुसैन की तहरीर पर दोनों दरोगा और सिपाही के खिलाफ विभूतिखंड थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। इसके अलावा एक मुकदमा हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार की ओर से दर्ज कराया है। इंस्पेक्टर विभूतिखंड अमर सिंह के मुताबिक अधिवक्ता सज्जाद हुसैन और अधिवक्ता आलोक शर्मा के मुताबिक पुलिस कर्मियों में काकोरी थाने के दरोगा उस्मान खान, लाखन सिंह और सिपाही पुष्पेंद्र सिंह है। दरअसल काकोरी थाने में 14 जनवरी को माल के ऊंचाखेड़ा गांव में रहने वाले सुशील कुमार ने अमीनाबाद निवासी वासिफ के खिलाफ गोवध निवारण अधिनयम के तहत मुकदमा दर्ज कराया था। वासिफ को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। वासिफ ने आमिना खातून का नाम भी गो-कसी में बताया।
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काकोरी पुलिस आरोपी आमिना की तलाश में दबिश दे रही थी। आरोप है कि लोकेशन के आधार पर दरोगा उस्मान खान, लाखन सिंह और सिपाही पुष्पेंद्र समेत अन्य लोग हाईकोर्ट पहुंच गए। पुलिस कर्मियों ने हाईकोर्ट में प्रवेश का पास भी नहीं बनवाया था। तीनों के साथ महिला पुलिसकर्मी भी थी। आमिना की तलाश में पुलिस कर्मी अनाधिकृत रूप से दबिश देने अधिवक्ता गुफरान के चेंबर 515 सी ब्लाक में पहुंच गए। चेंबर में घुसकर आमिना को घेर लिया। जब तक आमिना को पकड़ते तो अधिवक्ताओं ने विरोध किया। इस पर पुलिस कर्मी उनसे अभद्रता करने लगे।अधिवक्ताओं के विरोध पर मामला हाईकोर्ट के सुरक्षाकर्मी भी पहुंच गए। मामला तूल पकड़ता देख महिला समेत कई अन्य पुलिस कर्मी भाग खड़े हुए। दरोगा उस्मान खान, लाखन सिंह और सिपाही पुष्पेंद्र सिंह को अधिवक्ताओं ने पकड़ लिया। हाईकोर्ट चौकी की पुलिस को सूचना दी गई। तीनों को चौकी के सुपुर्द कर दिया गया। मामले की जानकारी पुलिस और हाईकोर्ट के उच्चाधिकारियों को हुई। इसके बाद सज्जाद और हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार ने विभूतिखंड थाने में दोनों दारोगा और सिपाही के खिलाफ तहरीर दी।इंस्पेक्टर ने बताया कि तीनों के खिलाफ दो मुकदमे दर्ज किए गए हैं। उधर, मामले की जानकारी पर पुलिस उपायुक्त पश्चिम विश्वजीत श्रीवास्तव ने तीनों को निलंबित कर दिया। अधिवक्ताओं ने दबिश और बिना पास के परिसर में प्रवेश करने की सीस फुटेज और वीडियो भी पुलिस को मुहैया करा दिया।
गेट पर बताया एडवोकेट जनरल कार्यालय जाना है पहुंच गए दबिश देने
अधिवक्ता आलोक शर्मा के मुताबिक उन्होंने परिसर के प्रवेश द्वार पर सुरक्षा कर्मियों से जानकारी ली। जानकारी लेने पर पता चला कि पुलिस कर्मियों ने एक तो पास नहीं बनाया। सुरक्षा कर्मियों ने जब अंदर जाने का कारण पूछा तो बोले कि एडवोकेट जनरल/सीएससी कार्यालय जाना है। दोनों कार्यालय में पता किया गया तो पुलिस कर्मी वहां नहीं पहुंचे इसकी पुष्टि हुई। आरोप है कि पुलिस कर्मी सुरक्ष में सेंध लगाकर अनाधिकृत रूप से अंदर पहुंचे थे।
एसीपी चौक को मामले की जांच
पुलिस उपायुक्त पश्चिम ने पूरे मामले की जांच एसीपी चौक राजकुमार सिंह को सौंपी है। एसीपी पुलिस कर्मियों के बयान लेकर और साक्ष्यों के आधार पर यह पता लगाएंगे कि तीनों पुलिस कर्मी किस उद्देश्य से आखिर हाईकोर्ट परिसर में अनाधिकृत रूप से क्यों पहुंचे? उनकी मंशा क्या थी? इसके बाद पूरे प्रकरण की रिपोर्ट सौपेंगे।

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