क्या दशहरा में खा सकते हैं नॉनवेज? इन जगहों पर खाने से कोई रोक-टोक नहीं, जानें क्यों
दशहरा, जिसे विजयदशमी के नाम से भी जाना जाता है, भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है. यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, जिसमें भगवान राम ने रावण पर और मां दुर्गा ने महिषासुर पर विजय प्राप्त की. हर घर में दशहरे को मनाने का तरीका अलग हो सकता है, लेकिन खाने-पीने की परंपराएं इसे खास बनाती हैं. ऐसे में अक्सर यह सवाल उठता है – क्या दशहरे के दिन नॉन-वेज खाना उचित है या नहीं?
परंपरागत रूप से दशहरा को शुद्धता और भक्ति का दिन माना जाता है. इस दिन कई हिंदू परिवार शाकाहारी भोजन को प्राथमिकता देते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि शाकाहारी भोजन को सात्विक माना जाता है, जो शरीर और मन को शुद्ध करता है. मांसाहार से परहेज करने को आत्म-नियंत्रण और जीवन के प्रति सम्मान जताने का तरीका माना जाता है. मंदिरों और सामुदायिक आयोजनों में अक्सर शाकाहारी व्यंजन परोसे जाते हैं, ताकि त्योहार का आध्यात्मिक महत्व बना रहे. भारत में भोजन की परंपराएं क्षेत्र और परिवार के अनुसार भिन्न होती हैं. उत्तर और पश्चिम भारत में दशहरा पर शाकाहारी भोजन आम है, लेकिन कुछ पूर्वी और दक्षिणी राज्यों में कुछ परिवार नॉन-वेज का सेवन करते हैं. बंगाल में पूजा और अनुष्ठानों के बाद कुछ घरों में मछली या चिकन खाया जाता है. केरल और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में स्थानीय परंपरा के अनुसार नॉनवेज व्यंजन भी शामिल हो सकते हैं.
कुछ सब्जियों को चिकन स्टाइल में खा सकते हैं
अगर आपका नवरात्रि के दिनों में नॉनवेज खाने का मन है, तो आप कुछ सब्जियों को चिकन स्टाइल में तैयार करके स्वाद का मजा ले सकते हैं. इसके लिए आप पनीर, सोया चंक्स, मशरूम या कॉलिफ्लावर जैसी सब्जियों का इस्तेमाल कर सकते हैं. इन्हें मसालेदार मैरिनेशन में डालकर तड़के के साथ भूनें या ग्रिल करें, जैसे चिकन पकाया जाता है. इससे सब्जियों में नॉनवेज जैसा स्वाद आएगा, लेकिन आप धार्मिक रूप से शुद्ध रहेंगे. यह तरीका न केवल हेल्दी है, बल्कि त्योहार के दौरान आपके खाने को रोचक और स्वादिष्ट भी बना देता है.

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