डेप्युटेशन पर गए अधिकारी, खाली पड़े पद और अतिरिक्त जिम्मेदारियाँ — क्या यूपी पुलिस तंत्र हो रहा है असंतुलित?”
लखनऊ: उत्तर प्रदेश पुलिस पर पूरे सूबे की कानून व्यवस्था को बनाये रखने के साथ ही तमाम जिम्मेदारियां है। लेकिन आलम यह है कि पुलिस विभाग में कई बड़े पदों पर अफसरों की तैनाती तक नहीं की गई है। उसी में से कई वरिष्ठ अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपकर फिलहाल काम चलाया जा रहा है। इतना ही नहीं, जिन आईपीएस अधिकारी को केंद्र ने तत्काल रिलीव करने के निर्देश दिए थे उन्हें अभी तक कार्यमुक्त नहीं किया गया है। ना ही उनकी जगह कौन आईपीएस अधिकारी जिम्मेदारी संभालेगा, उसका नाम तय हुआ है।
दरअसल कानपुर पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार का दिल्ली से बुलावा आया चुका है। बीते दिनों गृह मंत्रालय के माध्यम से यूपी मुख्य सचिव को पत्र लिखकर 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी अखिल कुमार को तत्काल कार्यमुक्त करने के निर्देश दिए थे। आईपीएस अखिल कुमार को केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन का सीईओ बनाया गया है। लेकिन अभी भी कानपुर सीपी अखिल कुमार को कार्यमुक्त नहीं किया गया है। ना ही उनकी जगह कानपुर पुलिस कमिश्नरेट का नया पुलिस आयुक्त कौन होगा, इसका नाम ही फाइनल हुआ है।
यूपी पुलिस में कई अन्य बड़े पद भी लंबे समय से रिक्त पड़े हैं। डीजीपी के जीएसओ एन रविंदर के रिटायर होने के बाद यह पद खाली है। वो 31 अगस्त को रिटायर हो गए थे। उनके साथ कई अन्य आईपीएस अधिकारी भी रिटायर हुए हैं। इसी तरह डीजी यूपी 112 नीरा रावत के पास भी अतिरिक्त प्रभार है। उनके पास आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) का अतिरिक्त जिम्मेदारी है। ऐसे ही एडीजी पदमजा चौहान (बाल महिला सुरक्षा-1090) को एडीजी फायर का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। जबकि कुछ दिन पहले ही एडीजी प्रशासन प्रशांत कुमार-2 को एडीजी पुलिस मुख्यालय का अतिरिक्त कार्यभार सौंप दिया गया है।

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