‘आइशा’ में हमारा उद्देश्य सामाजिक संदेश देना नहीं था: सोनम कपूर
मुंबई । फिल्म ‘आइशा’ को याद करते हुए बालीवुड अभिनेत्री सोनम कपूर ने बताया कि जब वे और उनकी बहन रिया कपूर इस फिल्म पर काम कर रही थीं, तभी उन्होंने तय कर लिया था कि वे इसके ज़रिए फैशन को लेकर कुछ नया और अलग करने जा रही हैं। सोनम की फिल्म ‘आइशा’ के 15 साल पूरे होने के मौके पर सोनम ने कहा, “जब हम ‘आइशा’ बना रहे थे, तब हमारा उद्देश्य कोई सामाजिक संदेश देना नहीं था। हम ऐसी फिल्म बनाना चाहते थे जो हमें और हमारी जैसी लड़कियों को देखकर मज़ा आए, और उस दौर में ऐसी फिल्में बॉलीवुड में नहीं बन रही थीं।” उन्होंने बताया कि ‘आइशा’ का उद्देश्य था एक ऐसा सिनेमा बनाना जो स्टाइलिश, ट्रेंडी और रिलेटेबल हो, खासकर उन लड़कियों के लिए जो अपने पहनावे और जीवनशैली के ज़रिए खुद को अभिव्यक्त करना चाहती हैं।
“फैशन हमारे लिए सिर्फ दिखावा नहीं था, बल्कि एक अभिव्यक्ति का माध्यम था। हम चाहते थे कि हर लड़की को लगे कि वह खुद को स्क्रीन पर देख रही है,” सोनम ने कहा। सोनम कपूर का मानना है कि ‘आइशा’ ने बॉलीवुड में फैशन को एक नई पहचान दी। यह पहली बार था जब फैशन को सिर्फ साज-सज्जा के तौर पर नहीं, बल्कि कहानी का अहम हिस्सा बनाया गया। इससे लोगों की सोच में बदलाव आया और यह महसूस होने लगा कि कपड़े केवल पहनने की चीज़ नहीं, बल्कि सोच और आत्मविश्वास का भी प्रतीक हैं। उन्होंने कहा, “आज भी ‘आइशा’ मेरे दिल के बहुत करीब है क्योंकि इसका किरदार लोगों को खुद से जोड़ने का मौका देता है।
आइशा एक ऐसी लड़की है जो खुद को समझने की कोशिश करती है, अपनी पहचान तलाशती है, और वही संघर्ष हर लड़की का होता है।” फिल्म में सोनम कपूर के साथ अमृता पुरी और ईरा दुबे भी मुख्य भूमिकाओं में थीं। निर्देशन राजश्री ओझा ने किया था, जबकि रिया कपूर ने इसी फिल्म से निर्माता के रूप में करियर की शुरुआत की थी। फिल्म की कहानी जेन ऑस्टिन के प्रसिद्ध उपन्यास ‘एम्मा’ से प्रेरित थी और यह एक युवा, अमीर लड़की के इर्द-गिर्द घूमती है जिसे रिश्ते जोड़ना पसंद है, लेकिन उसका यह स्वभाव उसके करीबी दोस्त अर्जुन को परेशान करता है।

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