औवेसी के लिए सुप्रीम कोर्ट से आई राहत भरी खबर....मान्यता रद्द करने की मांग वाली याचिका वापस
नई दिल्ली। असदुद्दीन ओवैसी की अगुवाई वाली पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के लिए राहत भरी खबर आई है। याचिकाकर्ता ने पार्टी की मान्यता रद्द करने की मांग को लेकर दायर याचिका वापस ले ली है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को यह स्वतंत्रता दी है कि वह नई याचिका दाखिल कर सकता है।
यह याचिका शिवसेना (तेलंगाना विंग) के अध्यक्ष तिरुपति नरसिम्हा मुरारी की ओर से दाखिल हुई थी। याचिकाकर्ता के वकील विष्णु शंकर जैन ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि एआईएमआईएम संविधान में निहित सेक्युलरिज्म के सिद्धांत का पालन नहीं करती है। उन्होंने कहा कि पार्टी केवल एक विशेष समुदाय के हितों की बात करती है, जो कि भारतीय संविधान और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के खिलाफ है।
वकील जैन ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि अगर मैं चुनाव आयोग के पास जाकर कहूं कि मैं वेदों और पुराणों को आधार बनाकर पार्टी बनाना चाहता हूं, तब मेरा रजिस्ट्रेशन नहीं होगा। फिर भी आयोग ने कैसे एआईएमआईएम को अल्पसंख्यक वर्ग के धार्मिक विचारों पर आधारित पार्टी के तौर पर मान्यता दी गई? उन्होंने कहा कि संविधान में सिर्फ माइनॉरिटी एजुकेशन इंस्टीट्यूशन के गठन का अधिकार है, राजनीतिक पार्टी बनने का अधिकारी नहीं है।
याचिका में कहा गया था कि चुनाव आयोग ने एआईएमआईएम को राजनीतिक दल के रूप में मान्यता देकर संविधान के सेक्युलर ढांचे का उल्लंघन किया है। औवेसी की पार्टी का एजेंडा सांप्रदायिक और एकपक्षीय है। पार्टी का एकमात्र मकसद सिर्फ मुस्लिम समुदाय के पक्ष में काम करना है। याचिकाकर्ता का दावा था कि यह पार्टी देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने के खिलाफ कार्य कर रही है।

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