मांडू अस्पताल में इलाज में लापरवाही, पद्मश्री सम्मानित की पत्नी को नहीं मिला समय पर उपचार
धार। धार से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां पद्मश्री से सम्मानित डॉक्टर सुब्रतो राय की पत्नी को सरकारी उप स्वास्थ्य केंद्र में समय पर उपचार नहीं मिला और सिस्टम की लापरवाही का शिकार होना पड़ा। मामले में कार्रवाई करते हुए प्रभारी डॉक्टर को निलंबित कर दिया गया है।
दरअसल पद्मश्री सम्मानित और हाईवे मैन के नाम से मशहूर गुजरात के डॉ. सुब्रतो राय शनिवार को अपने परिवार के साथ प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मांडू भ्रमण के लिए आए थे। वहां उनकी पत्नी सुष्मिता राय को कुत्ते ने काट लिया। रैबीज का इंजेक्शन लगवाने के लिए वे घंटों तक अस्पतालों के चक्कर काटते रहे, लेकिन कहीं भी सही इलाज नहीं मिल पाया। जांच के बाद मांडू उपस्वास्थ केंद्र की प्रभारी को निलंबित कर दिया गया है।
पूरा मामला विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मांडू का है, जहां मांडू घूमने आए डॉक्टर सुब्रतो राय की पत्नी को शनिवार को कुत्ते ने काट लिया। इसके बाद वे तुरंत मांडू के उपस्वास्थ्य केंद्र पहुंचे, लेकिन वहां न तो डॉक्टर मौजूद थे और न ही रैबीज का इंजेक्शन। मजबूरी में इधर-उधर भटकना पड़ा। इसके बाद उन्हें बोला गया रैबीज इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है, जिसके चलते मरीजों को भटकना पड़ा। मामला तब और गंभीर हो गया जब सामने आया कि रैबीज इंजेक्शन की भारी कमी है। प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र में भी यह इंजेक्शन नहीं मिल रहा। प्रदेश सरकार की स्वास्थ्य सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे इस एक घटना से सवालों के घेरे में आ गए हैं, सवाल ये उठता है कि जब पद्मश्री सम्मानित व्यक्ति को इलाज के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है, तो आम लोगों की स्थिति क्या होगी?
इधर मामला तूल पकड़ने के बाद मांडू उप स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉ. चांदनी डाबोरिया को लापरवाही बरतने के कारण निलंबित कर दिया गया। धार कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने बताया कि मांडू के सरकारी अस्पताल में मांडू भ्रमण पर आए पद्मश्री के परिजन को उपचार नहीं मिल पाया। समाचार पत्रों के माध्यम से जानकारी सामने आई थी। इसके बाद इंदौर से आए जांच दल ने रिपोर्ट तैयार की, जिसमें वहां इंचार्ज डॉ. चांदनी डाबरोलिया द्वारा लापरवाही बरतना पाया गया। इसके आधार पर स्वास्थ्य विभाग के द्वारा उन्हें निलंबित किया गया है। साथ ही सभी शासकीय कर्मियों कों निर्देश दिए गए हैं कि इस प्रकार की घटना की पुनरावृति ना हो। बता दें कि गुजरात के बड़ौदा के रहने वाले डॉ. राय को 1999 में सड़क हादसे में इलाज नहीं मिलने पर 6 घंटे दर्द सहना पड़ा था, जिसके बाद उन्होंने लाइफ लाइन संस्था की स्थापना की थी। साथ ही 108 एंबुलेंस की नींव रखने में उनका भी महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है।
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