Bank of Baroda का अनुमान: मई में रिटेल CPI केवल 2.7%, खुशखबरी उपभोक्ताओं के लिए
नई दिल्ली| अगर आप रोजमर्रा की चीजों की बढ़ती कीमतों से परेशान हैं, तो यह खबर आपको राहत पहुंचा सकती है। बैंक ऑफ बड़ौदा ने अपनी नई रिपोर्ट में कहा है कि चालू वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2025) में महंगाई रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के अनुमान के मुताबिक रहेगी।
RBI ने पूरे वित्त वर्ष के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) यानी खुदरा महंगाई का औसत 3.7% रहने का अनुमान लगाया है। पहली तिमाही में यह 2.9%, दूसरी तिमाही में 3.4%, तीसरी तिमाही में 3.9%, और चौथी तिमाही में 4.4% रहने की उम्मीद है। बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट कहती है कि यह संभव होगा, क्योंकि सांख्यिकीय आधार अनुकूल है और जरूरी चीजों की कीमतें लगातार कम हो रही हैं।
सब्जियों-दालों की कीमतों में गिरावट
बैंक ऑफ बड़ौदा का आवश्यक वस्तु सूचकांक जून 2025 में 1.8% की गिरावट दिखाता है, जो मई 2025 की 0.6% गिरावट से ज्यादा है। यह लगातार तीसरे महीने की गिरावट है, जिसकी मुख्य वजह सब्जियों और दालों की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। जून में प्याज की खुदरा कीमतों में 26.1%, आलू में 20.3% और टमाटर में 24% की गिरावट दर्ज हुई है।
सबसे ज्यादा गिरावट अरहर की दाल में
दालों की बात करें तो सबसे ज्यादा अरहर दाल में 23.8% की गिरावट हुई है। यह लगातार चौथा महीना है, जब अरहर की दाल में दो अंकों की गिरावट रही। इसके अलावा उड़द, मूंग और मसूर की कीमतें भी घट रही हैं। माना जा रहा है कि इसी के चलते बाजार में जरूरी सामानों की लागत कम हुई है, जो आम आदमी की जेब पर बोझ कम कर सकती है।
आम आदमी के लिए क्या हैं मायने?
यह गिरावट ग्राहकों के लिए राहत की खबर है। सब्जियां और दालें, जो रोजमर्रा की जरूरत हैं, सस्ती होने से घरेलू बजट संभालना आसान हो सकता है। हालांकि, यह ट्रेंड लंबे समय तक बना रहे, इसके लिए मौसम और सप्लाई चेन पर नजर रखनी होगी। अगर महंगाई RBI के अनुमान के मुताबिक रही, तो ब्याज दरों में बदलाव की संभावना भी कम होगी, जो लोन लेने वालों के लिए फायदेमंद हो सकता है।
महंगाई को प्रभावित कर सकती है बारिश
विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश और ग्लोबल मार्केट की स्थिति महंगाई को प्रभावित कर सकती है। इसलिए, सरकार और RBI की ओर से आने वाली नीतियों पर नजर रखना जरूरी है। अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो अगले कुछ महीनों में महंगाई नियंत्रित रह सकती है।

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