दक्षिण कोरियाई अदालत का ऐतिहासिक फैसला, यून सुक योल अब राष्ट्रपति नहीं
सियोल। दक्षिण कोरिया की सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रपति यून सुक योल को पद से हटा दिया है। यून सुक योल पर देश में मार्शल लॉ लागू करने और संसद में सेना भेजने का आरोप है। चार महीने पहले दक्षिण कोरिया में मार्शल लॉ लगाने के बाद राजनीतिक अस्थिरता का दौर शुरू हो गया जिसके कुछ ही घंटे बाद राष्ट्रपति ने मार्शल लॉ को हटाने का एलान किया था।
राष्ट्रपति पर अदालत का आरोप
आज सुबह अदालत में फैसला पढ़ते समय कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मून ह्युंग-बे ने मार्शल लॉ घोषित करने के यून के प्रत्येक कारण को खारिज कर दिया और कहा कि राष्ट्रपति ने दिसंबर में राजधानी की सड़कों पर सैनिकों को तैनात करके अपने अधिकार का गलत इस्तेमाल किया है।
'कोरियाई लोगों को दिया धोखा'
मून ने कहा, प्रतिवादी ने संवैधानिक संस्थाओं के अधिकार को खत्म करने के लिए सैन्य और पुलिस बलों को जुटाया और लोगों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया। ऐसा करके, उन्होंने संविधान को बनाए रखने के अपने संवैधानिक कर्तव्य को त्याग दिया और कोरियाई लोगों के विश्वास को गंभीर रूप से धोखा दिया। इस तरह का गैरकानूनी और असंवैधानिक व्यवहार को संविधान के तहत बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है।
दो महीने में होंगे चुनाव
दक्षिण कोरिया की नेशनल असेंबली ने 14 दिसंबर को यून पर महाभियोग चलाने के लिए मतदान किया था, लेकिन उन्हें औपचारिक रूप से निष्कासित करने के लिए संवैधानिक न्यायालय की मंजूरी की आवश्यकता थी। सरकार के पास अब राष्ट्रपति चुनाव कराने के लिए 60 दिन हैं। कार्यवाहक राष्ट्रपति हान डक-सू तब तक अपने पद पर बने रहेंगे।
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