महाशिवरात्रि और शिवरात्रि में क्या है अंतर जानें, क्यों मनाया जाता है यह पर्व
महाशिवरात्रि का पर्व इस बार 26 फरवरी दिन बुधवार को है, हर वर्ष यह पर्व फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है. वहीं शिवरात्रि हर मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आती है. यूं तो भगवान शिव की पूजा अर्चना करने के लिए हर दिन बेहद पवित्र माना जाता है लेकिन सावन मास, सोमवार का दिन, शिवरात्रि और महाशिवरात्रि का अपना विशेष महत्व है. महाशिवरात्रि और शिवरात्रि का पर्व दोनों ही भगवान शिव को समर्पित हैं, महाशिवरात्रि का पर्व सालभर में एक बार मनाया जाता है तो शिवरात्रि का हर माह पड़ती है. आइए जानते हैं आखिर महाशिवरात्रि और शिवरात्रि में क्या है अंतर…
शिवरात्रि
हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को शिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है, इसलिए मासिक शिवरात्रि भी कहते हैं. ऐसे सालभर में 12 शिवरात्रि पड़ती हैं. पंचांग के अनुसार, सावन में आने वाली चतुर्दशी तिथि को बड़ी शिवरात्रि भी माना जाता है क्योंकि इस दिन भगवान शिव ने हलाहल विष को कंठ में धारण किया था. इस तरह सभी शिवरात्रि के अलावा सावन शिवरात्रि का अपना महत्व है. शिवरात्रि का पर्व हमको यह बोध कराता है कि हम सभी शिव के अंश और एक दिन उनमें ही मिल जाना है.
महाशिवरात्रि
महाशिवरात्रि का पर्व फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह भी हुआ था. इसलिए इस पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के उपलक्ष्य में मनाया जाता है. इस तरह महाशिवरात्रि का पर्व साल में एक बार और शिवरात्रि का पर्व हर महीने मनाया जाता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की रात्रि को भगवान शिव लाखों सूर्य के समान प्रभाव वाले लिंग के रूप में प्रकट हुए थे. महाशिवरात्रि के पर्व को हिंदू धर्म में सबसे बड़ा पर्व माना जाता है और इस व्रत के करने से साधक को मोक्ष की प्राप्ति होती है.
शिव और शक्ति का दिन है महाशिवरात्रि
महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की विशेष पूजा अर्चना की जाती है. महाशिवरात्रि की रात्रि के चारों प्रहरों में भगवान शिव की पूजा का विधान है. इस दिन उपवास और रात्रि जागरण का विशेष महत्व है. यह दिन शिव और शक्ति के मिलन की रात है और इस रात भगवान शिव अपने भक्तों को विशेष आशीर्वाद भी देते हैं और उनकी सभी मनोकामनाओं का पूरी करते हैं. भोलेनाथ के भक्त इस दिन को उपवास और श्रद्धाभाव के साथ मनाते हैं और अपने आराध्य देव शिवजी का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए पूरे परिवार के साथ शिव पूजन करते हैं. महाशिवरात्रि को सूर्यदेव पूरी तरह उत्तरायण में आ चुके होते हैं और ऋतु परिवर्तन इस दिन से शुरू हो जाता है.
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